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एक साल की कसरत, सेफ व्हीकल पॉलिसी पर स्कूल लापरवाह, एडीसी ने 15 को तलब किए

5 वर्ष पहले
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गोहीरांमें स्कूल बस हादसे के बाद सेफ ट्रांसपोर्टेशन पॉलिसी लागू करने की डिप्टी कमिश्नर कमल किशोर यादव की कसरत को लेकर स्कूल लगातार उदासीन बने हैं। एक साल बीतने पर भी 757 में से सिर्फ 260 ने ही एफिडेविट भरकर कहा है कि अगर उनके वाहन से हादसा हुआ तो वह जिम्मेदार होंगे। उनके वाहनों में सेफ्टी के सारे इंतजाम हैं। इसके बाद डीसी ने 15 फरवरी को वो स्कूल तलब कर लिए हैं, जिन्होंने एफिडेविट नहीं भरा। मीटिंग सुबह दस बजे होगी। इसकी अगुवाई एडीसी गिरीश दयालन करेंगे।

एडीसी गिरीश दयालन ने स्कूल प्रबंधकों को आदेश दिया है कि वे 15 फरवरी को अपनी गाड़ियों की सूचना के साथ मीटिंग में पहुंचें।

जिला ट्रांसपोर्ट ऑफिस के अनुसार स्कूली बसों में बच्चों की सुरक्षा के लिए अटेंडेंट, स्किल्ड ड्राइवर, जीपीआरएस, सीसीटीवी कैमरे, स्पीड कंट्रोल सिस्टम और बच्चों की सहूलियत के लिए हाइड्रॉलिक दरवाजे जरूरी हैं। डीसी केके यादव ने सेल्फ एसेसमेंट का फार्मूला इजाद कर सभी स्कूलों को एफीडेविट पर लिखकर देने को कहा था कि उनके वाहन सेफ हैं। हादसे की जिम्मेदारी उनकी है। स्कूल एसोसिएशन ने कहा कि सड़क पर ऐसी कई वजहें संभव हैं, जिनसे एक्सिडेंट हो सकता है, वह कैसे सबकी जिम्मेदारी लें। इनमें भी 157 स्कूलों ने जिला प्रशासन को ये लिखकर दे दिया कि उनके पास बच्चों को लेकर जाने वाले किसी भी वाहन की ओनरशिप नहीं है।

बस्ती पीरदाद में ऑटो के पीछे एक लेटी एक बच्ची।

> अब तक प्रशासन ने स्कूलों में स्पाट विजीट करके सर्वे नहीं किया है।

> जिन स्कूलों ने परफार्मा भरकर सेफ व्हीकल होने का दावा किया, उनकी स्पाट विजिट नहीं की गई।

> स्कूल ठेकेदारों से ट्रांसपोर्टेशन आउटसोर्स करते हैं। इस आधार पर कहने लगे कि हम किसी भी वाहन के मालिक नहीं।

> स्कूलों ने खुद ही बताया कि उनके पास कितने वाहन, प्रशासन ने क्रास चैक नहीं किया।

> आटो पर घर जा रहे बच्चों को रोका नहीं जा सका।

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