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जीवन के अनुभव साझे किए हैं रिशी ने

5 वर्ष पहले
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सिखपरिवारों की तीन पीढ़ियों की शादियों के जरीए बदलते समाज का चित्रण। विदेशों में बसे पंजाबियों की दुर्दशा। जापानी समाज की अच्छाइयां जिन्हें भारतीयों को अपनाना चाहिए। संसारपुर के रहने वाले एचपी सिंह रिशी ने अपनी नई किताब में अपने जीवन के अनुभव पर इन तीन बिंदुओं पर किताब लिखी है। नाम है : रूट्स, शूट्स, बूट्स। इसे मंगलवार को रिलीज किया विधायक परगट सिंह ने। प्रेस क्लब में रिलीज समारोह में पत्रकारिता के स्टूडेंट्स भी पहुंचे। रिशी कामनवेल्थ गेम्स की आयोजन समिति में उपमहानिदेशक रहे हैं। अंग्रेजी अखबारों के लिए पत्रकारिता करने वाले रिशी अपनी किताब स्पोर्ट्स सकेर: घोस्ट दैट हंटिड कामनवेल्थ गेम्स, न्यू डेल्ही - 2010 से चर्चा में आए थे।

रिशी ने अपनी किताब में जीवन के अनुभव सांझा किए हैं। ये तीन हिस्सों में बंटी है। पहला हिस्सा है : रूट्स। इसमें ऋषि और मंडेला का अध्याय है। इसमें सिख परिवार की तीन पीढ़ियों की शादियों के जरिए समाज के अलग-अलग पहलू महसूस कराए हैं। साथ ही विदेश में बसे पंजाबियों की दुर्दशा बताई है। वो यादें भी सांझा की हैं जिसमें लेखक महसूस करता है कि अंग्रेज उनकी पगड़ी को कैसे देखते हैं। दूसरे हिस्सा शूट्स में लेखक के निजी अनुभव हैं। भारतीय लोग जापानियों से कैसे सीख लें। इसी में कर, व्यापार, मंत्र और अंध भक्ति की बात की है। तीसरे बूट्स हिस्से में लेखक के जीवन में कठोर मेहनत अच्छी बुरी घटनाओं की छाप है।

कॉमनवेल्थ खेलों की आयोजन समिति में उपमहानिदेशक रहे हैं रिशी।

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