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गारंटी बांड में अधिकारी शामिल होने पर ही टेंडर भरेंगे निगम ठेकेदार

5 वर्ष पहले
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टेंडरकी शर्तों काे लेकर लोकल बाडीज और ठेकेदारों में टकराव बढ़ता जा रहा है। ठेकेदारों की चंडीगढ़ में लोकल बॉडीज प्रिंसिपल सेक्रेटरी से मीटिंग थी लेकिन ठेकेदार मीटिंग में नहीं गए। सोमवार को दोबारा मीटिंग का शेड्यूल तय किया गया है। सरकार दो साल तक सिक्योरिटी राशि और अगले तीन साल तक के लिए बांड देने की शर्त हटाने के मूड में नहीं है।

ठेकेदार चाहते हैं कि अगर गारंटी बांड में अधिकारियों को शामिल किया जाए तो वह गांरटी बांड भरने का तैयार हैं। वीरवार को 30 करोड़ के सड़कों के टेंडर भरने की आखिरी तारीख थी लेकिन ठेकेदारों के बड़े ग्रुप ने टेंडर नहीं भरे। कुछ ठेकेदारों ने सीसीफ्लोरिंग और सड़कों के 15 करोड़ के टेंडर भरे हैं। बाखी टेंडरों के लिए दोबारा तारीख तय होगी। ठेकेदार अवतार सिंह, अमित बजाज, मुकेश चोपड़ा, विजय शर्मा, विजय बब्बू, गौरव गुप्ता, निर्मल सिंह पोपली, हरमिंदरजीत सिंह सैनी ने कहा कि सोमवार को मीटिंग में जाएंगे। उन्होंने कहा कि लोकल बाडीज मंत्री अनिल जोशी का बुधवार को जो रुख था उससे लगाता नहीं कि सरकार उनकी मांगों का लेकर गंभीर है। ठेकेदारों ने कहा कि सड़कों के काम के लिए जो स्पेसिफिकेशन तय की गई है वह इंडियन रोड कांग्रेस की तय मापदंड के अनुसार नहीं है। जो एस्टीमेट बनाए गए हैं और जो मटीरियल तय किया गया है वह भी सही नहीं है।

सरकार की परेशानी

सड़कनिर्माण में करप्शन के आरोप लगातार लग रहे हैं। एसडी कालेज रोड तो दोबारा से बनाने के आदेश देने पड़े थे। फगवाड़ा गेट मार्केट की सड़क घटिया तरीके से बनाने का मुद्दा दुकानदारों ने उठाया था। दुकानदारों ने अपनी निगरानी में सड़क बनवाई थी। सरकार चुनावी साल में ऐसे आरोपों से बचने के लिए टेंडरों के लिए नई शर्तें लाई है।

ठेकेदारों के एक ग्रुप ने 15 करोड़ के टेंडर भरे

बायकाटके बीच कुछ ठेकेदारों ने सड़कों के 15 करोड़ के टेंडर भरे हैं। सात करोड़ रुपए के टेंडर सीसी फ्लोरिंग के भरे गए हैं। जबकि 8 करोड़ रुपए के टेंडर लुक बजरी है। खास बात ये है कि ये सड़कें छोटी-छोटी हैं। ये वो सड़कें बताई जा रही हैं। जिनकी 5 साल की गारंटी नहीं होगी।

ठेकेदारों का तर्क

ठेकेदारोंका कहना है कि सरकार ने सड़क बनाने के दौरान मटीरियल और काम की जांच के लिए दो एजेंसियां तय की हैं। नगर निगम के अफसर भी लगातार निगरानी पर रहेंगे। इतनी जांच के बाद भी सड़क टूटती है तो कसूर सिर्फ ठेकेदार का कैसे होगा। गारंटी बांड पर अगर नगर निगम के एक्सीयन लेवल अफसर के भी साइन लिए जाएं तो उन्हें बांड भरने में कोई एतराज नही है।

अब सोमवार को मीटिंग में टेंडर की नई तारीख तय

की जाएगी

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