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78 फीसदी हादसे मोबाइल के कारण - डॉ. चित्तकारा

5 वर्ष पहले
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निष्कामसेवाभारती ट्रस्ट ने मेहरचंद पॉलिटेक्निक कॉलेज में ‘पुनर्जीवन और मैनेजमेंट ऑफ रोड सेफ्टी एक्सीडेंट’ पर सेमिनार करवाया। डॉ. हाविन चित्तकारा ने वीडियो के जरिए रोड सेफ्टी के बारे में बताया। दुर्घटना होने के कारणों की जानकारी दी।

वर्ल्ड सर्वे के मुताबिक 78 फीसदी एक्सीडेंट वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल करने के कारण होते हैं। 50 किलोमीटर की स्पीड पर वाहन चलाते समय दो सेकेंड मोबाइल पर बात करना या मैसेज देखना 50 मीटर तक कुछ दिखाई देने के बराबर होता है। हम अक्सर सोचते है कि कार में एयरबैग है, तो सीट बेल्ट की क्या जरूरत। लेकिन ऐसा नहीं है कई बार दुर्घटना के बाद कार के अंदर जोरदार झटका लगता है, जिस कारण दिल की नाड़ियों को नुकसान होता है और छाती की हड्डियां तक टूट जाती है। जख्मी को अस्पताल तक ले जाने का मौका नहीं मिलता। वहीं दोपहिया वाहन चलाते समय आईएसआई मार्क लगा हेलमेट पहनना चाहिए। यहां पर डॉ. कपिल गुप्ता, एडीसीपी ट्रैफिक अवनीत कौंडल, ट्रैफिक पुलिस के शमशेर सिंह और प्रिंसिपल जगरूप सिंह थे।

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एयरवे: इसमें यह देखा जाता है कि मुंह में कोई चीज तो नहीं जिसे सांस लेने में रुकावट रही है। अगर कोई चीज है तो उसे बाहर निकाले।

बीब्रीडिंग: गर्दन, छाती, सिर एक ही पोजिशन में होने चाहिए। जख्मी को किसी उबड़- खाबड़ जगह पर नहीं लेटाना चाहिए। उसे उठाने के समय आसपास के लोगों से मदद ले ताकि पीठ पर भार पड़े।

सीसीपीआर: यह चेक करे की व्यक्ति की सांस चल रही है। अगर नहीं तो छाती पर एक हाथ रख कर दूसरा हाथ से प्रेस करें। ऐसा कम से कम 30 बार करे। जरूरत पड़ने पर मुंह से सांस दें।

सेमिनार में मौजूद अवनीत कौंडल।

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