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लोक गीत, वार गायन से विरसे से जुड़ने का संदेश

5 वर्ष पहले
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दो दिवसीय मेले में आज होंगे आज मिमिक्री, स्किट, फोक डांस फीमेल मुकाबले

कंडेउते मेहरमां वे..आजा कदों दी खड़ी... बोल मिट्टी देया बावेया जैसे लोकगीतों ने अपना विरसा भूल चुके पंजाबियों को फिर से इन लोकगीतों के जादू से बांध दिया। मौका था इंडियन कल्चरल एसोसिएशन करतारपुर की ओर से डीएवी प्राइमरी स्कूल में हुए 35वें लोक कला मेले का दो दिवसीय इस मेले के पहले दिन लोकगीत, कविश्री, ढाडी वार और भंगड़ा के मुकाबले हुए। मेले की शुरुआत संत बाबा निर्मल दास जोड़े ने शब्द गायन से की।

मेले की शुरुआत सोसायटी के प्रधान कर्मपाल सिंह ढ़िल्लों ने की थी जब वह 25 साल के थे। उनकी जिद थी लोक कलाओं को प्रफुल्लित करना। इसके लिए उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई भी छोड़ दी। यहां संगीतकार बीएस नारंग, यूथ अकाली दल दोआबा के सेक्रेटरी जनरल हरिंदर सिंह ढींढसा, खडूर साहिब कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एसके बांगर,सिकंदर मल्ली, दीप सिंह,सतपाल, एमजेएसएम जनता कॉलेज के प्रिंसिपल आरएस शैली,सुरिंदर चौधरी, चरणजीत सिंह पुरेवाल, नॉबेल स्कूल के सीएल कोछड़, वाइस प्रेजीडेंट जस्सी भुल्लर, बलदेव सिंह फुल, जत्थेदार रणजीत सिंह काहलों, प्रिंस अरोड़ा, प्रीतम सिंह नारंगपुरी, गुरदीप मिंटू, दलविंद्र दयालपुरी, रजनीश सूद, सूरजभान, मनजीत सिंह, गुरदेव भोगल, सुमनलता, जगतार सिंह, पूर्व जज जीके सभ्रवाल, नरिंद्र गिल, कॉलेज प्रधान सुरिंदर सिंह, आरएल सैली, भारत शर्मा, सुरिंदर आनंद थे। पंजाब के राज ढोली चरणदास भी विशेष तौर पर पहुंचे। 85 वर्ष के हैं लेकिन लोक कलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए वे आए। उन्होंने कहा कि इस मेले ने पंजाबियत को जिंदा रखा है।

लोकगीत, वार गायन और कविश्री के जज - म्यूजिक डायरेक्टर कुलजीत सिंह पहली बार इस मेले में जजमेंट करने आए। उन्होंने कहा कि वे साल 1994 से इस फील्ड में हैं। गवर्नमेंट कॉलेज भुलत्थ के प्रो. सुखविंदर सागर ने कहा कि वे 25 साल से इस लाइन में हैं। पांच बार यहां जजमेंट करने चुके हैं। गुरजीत सिंह ने कहा कि वे साल 2007 से इस मेले में जज बनकर आते हैं। जगतार सिंह जो कई गानों के लिरिक्स लिख चुके हैं, वे भी जज थे।

भंगड़ा पेश करते कॉलेज छात्र।

इंडियन कल्चरल एसोसिएशन करतारपुर की ओर से डीएवी प्राइमरी स्कूल में हुए 35वें लोक कला मेले का उद्घाटन संत बाबा निर्मल दास जोड़े ने िकया।

1. अमेरिका से कर्मपाल सिंह ढ़िल्लों की बहन खासतौर से मेले में शामिल हुई। वे हर बार लोक कला के मेले का हिस्सा बनने आती हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका में ऐसे मेले तो लगते रहते हैं, लेकिन यहां पर लोग अपने सभ्याचार को भूलते जा रहे हैं।

जज - गुरदेवसिंह भोगल, हरप्रीत सिंह बबलू, इंदरप्रीत सिंह और दूरदर्शन चंडीगढ़ के प्रोड्यूसर परमजीत कुमार

ओवरऑल विनर एचएमवी कॉलेज जीएनडीयू ब्रेकेटिड विनर। सैकेंड रनर अप श्री गुरु अंगद देव कॉलेज खडूर साहिब और संत बाबा भाग सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग।

लोकगीत- 1.केएमवी की प्रिया, सेंट सोल्जर कॉलेज का अनूप सिंह ब्रेकेटिड फर्स्ट

2. एनजेएस गवर्नमेंट कॉलेज कपूरथला की रुपिंदर कौर और एमजेएसएम जनता कॉलेज करतारपुर की किरनदीप कौर।

3. खालसा कॉलेज अमृतसर की अंतरप्रीत कौर और आरआर बावा डीएवी कॉलेज बटाला की दमनप्रीत कौर।

स्पेशलप्राइज : मातागुजरी कॉलेज करतारपुर के अविनाश और जगदीप कौर को मिला।

वारगायन : 1.एचएमवी कॉलेज

2. हिंदु कन्या कॉलेज कपूरथला और ब्रेकेटिड सैकेंड जीएनडीयू अमृतसर।

3. माता गुजरी खालसा कॉलेज करतारपुर

कविश्री: 1.एमजेएसएम जनता कॉलेज करतारपुर

2. एचएमवी कॉलेज।

3. श्री गुरु अंगद देव खडूर साहिब और एनजेएसए गवर्नमेंट कॉलेज कपूरथला।

भंगड़ा: 1.डीएवी कॉलेज जालंधर

2. सिख नेशनल बंगा, डेविएट कॉलेज।

3. दसूहा जेसी, खडूर साहिब और संत बाबा भाग सिंह इंस्टीट्यूट।

गायकों प्रभ गिल, मन्ना ढ़िल्लों, हारवी संधु ने भी अपने गीतों से सभी का मनोरंजन किया। आज मिमिक्री, स्किट, फोक डांस फीमेल, हिस्ट्रॉनिक्स के मुकाबले होंगे।

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