मां बोली में विद्यार्थी आसानी से सीख लेते हैं : डॉ. दलजीत सिंह
देशभरके शिक्षा मंत्रियों ने स्कूली शिक्षा मातृ भाषा में देने की वकालत की है, क्योंकि वैज्ञानिक स्तर पर यह सिद्ध हो चुका है कि विद्यार्थी विषयों के बुनियादी ज्ञान को मातृ-भाषा में ओर ज्यादा बढ़िया तरीकों के साथ ग्रहण करते हैं। स्कूली शिक्षा के प्रति मीडियम को लेकर बनी गलत धारणाओं को तोड़ने के लिए अध्यापकों और विद्यार्थियों को आगे आना चाहिए। कुछ इस तरह शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जमशेर खास के सालाना फंक्शन में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि देशभर में राज्यों के शिक्षा मंत्री विद्यार्थियों की प्रतिभा की निखारने के लिए स्कूली शिक्षा को मातृ-भाषा में ही देने की पैरवी कर रहे हैं। अंग्रेजीसीखें जरूर, पर मातृ-भाषा का सत्कार करना भूलें
अंग्रेजीअंतराष्ट्रीय स्तर पर संचार की भाषा होने के कारण विद्यार्थी इसको अच्छी तरह सीखें, मगर मातृ-भाषा का सत्कार करना भूलें। सरकार की तरफ से प्राईवेट स्कूलों में भी पंजाबी भाषा विषय को बढ़िया तरीके से पढ़ाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य भर के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की रुचियों अनुसार उच्च शिक्षा के चयन संबंधी 300 करियर टीचर तैयार किए और जिला क्लस्टर स्तर पर जागरूकता कैंप लगाए जा रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने पहले स्कूल के नए बने कमरों का उद्घाटन किया और नए बनने वाले कमरों का नींव पत्थर रखा। उन्होंने अपने स्वैच्छिक कोटे से पांच लाख रुपए देने की घोषणा भी की। बेहतर कारगुजारी वाले विद्यार्थियों, अध्यापकों और स्कूल के विकास के लिए रचनात्मक योगदान डालने वाले प्रवासी भारतीयों का विशेष सम्मान किया। यहां विधायक परगट सिंह, जिला प्लानिंग बोर्ड के चेयरमैन गुरचरन सिंह चन्नी, डीईओ हरिंदरपाल सिंह, जिला गाइडेंस काउंसलर सुरजीत लाल, प्रिंसिपल अशोक बसरा थे।