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21वीं सदी में भी हम ब्रह्मांड का छठा हिस्सा ही देख पाए हैं

5 वर्ष पहले
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जालंधर। डार्क मैटर यानी काला पदार्थ अदृश्य है। वैज्ञानिक सालों से डार्क मैटर को समझने की कोशिश में जुटे हैं। कहने को तो तीन चौथाई ब्रह्मांड उसी का बना है पर देखने पर वह कहीं रत्ती भर भी दिखाई नहीं पड़ता। इस डार्क मैटर को समझाना ही फिजिक्स के रिसर्चरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
ये बात दिल्ली यूनिवर्सिटी से आए वक्ता डाॅ. अशोक कुमार ने कही। वह एनआईटी के फिजिक्स डिपार्टमेंट में चल रहे चार दिवसीय न्यूक्लियर फिजिक्स एंड पार्टिकल फिजिक्स : प्रजेंट्स एंड फ्यूचर विषय पर दूसरे दिन बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि ब्रह्मांड की अनंत आकाशगंगाओं के 90 फीसदी से ज्यादा पदार्थ अनजाने हैं। डार्क मैटर यानी ऐसे तत्व, जो न तो प्रकाश छोड़ते हैं, न सोखते हैं और न ही परावर्तित करते हैं। खगोलशास्त्री भी ब्रह्मांड का सिर्फ छठा हिस्सा देख पाते हैं।
आईआईएसईआर के प्रो. सीएस औलख ने बताया कि ब्रह्मंड की उत्पति को लेकर हर समय रिसर्च हो रही है, लेकिन अभी तक ब्रहामंड की उत्पत्ति का प्रमाणिक कारण नहीं पता चल सका है। यहां फिजिक्स डिपार्टमेंट के हेड डाॅ. रोहित मेहरा, डाॅ. हरलीन दहिया, और डाॅ. अरविंद कुमार भी थे।
नया पार्टिकल : इसके बनने पर डार्क मैटर की जानकारी मिलेगी
अगर पूरे आकाशगंगाओं और तारों के द्रव्य जोड़ दिए जाएं, तो यह ब्रह्मांड का सिर्फ पांच फीसदी हिस्सा है। बाकी डार्क मैटर हैं, अनजाने तत्व। लार्ज हेड्रॉन कोलाइडर उस गति तक पहुंचना चाहता है, जहां से पैदा होने वाली ऊर्जा डार्क मैटर के सवाल का जवाब दे सके। इस पर स्विटरजरलैंड में शोध चल रहा है।
यदि हाई एनर्जी पर पार्टिकल के कोलाइड करने पर कोई नया पार्टिकल बनता है तो डार्क मैटर के बारे में कुछ पता चल सकेगा।
नई रिसर्च : न्यूट्रिनो पार्टिकल का मास होता है
जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी दिल्ली के थियोरेटिकल फिजिक्स सेंटर के डाॅ. रतिन अधिकारी ने न्यूट्रिनो फिजिक्स के बारे बताया कि पहले यह मना जाता था कि न्यूट्रिनो का कोई मास नहीं होता। लेकिन अब नई रिसर्च से ये पता चला है कि न्यूट्रिनो पार्टिकल का मास होता है।
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