कपूरथला। दुबई से आई अज्ञात फोन कॉल्स से गांव रूपनपुर का एक परिवार पिछले पांच दिन से मातम में है। इंटरनेट के जरिए अलग-अलग नंबरों से आई फोन कॉल्स ने परिवार के 32 वर्षीय बेटे साहिब सिंह की मौत की खबर से परिवार गमगीन है। वहीं साहिब से पिछले पांच दिन में कोई संपर्क न होने से परिवार को उसके जीवित अथवा मृत्यु की कोई खबर नहीं है। परिवार के एक सदस्य ने दुबई का वीजा अप्लाई किया है ।
रूपनपुर से अप्रैल 2013 साहिब सिंह दुबई की एएनसी हॉलीडेल एलएलसी अल्कोज कंपनी में लेबर का काम करने गया था। आठ फरवरी की दोपहर ढाई बजे साहिब सिंह के जीजा रणजीत सिंह को उसकी मौत की सूचना वाली कॉल आई। उसके बाद से परिवार में खलबली मची हुई है। कॉल करने वाला के बारे में परिवार को कोई जानकारी नहीं है। साहिब सिंह के जीजा रणजीत सिंह निवासी गांव खस्सण सब डिवीजन भुलत्थ ने बताया कि पांच फरवरी को साहिब सिंह की सुबह दस बजे कॉल आई थी और परिवार के सदस्यों से उसने बात की। उसके बाद आठ फरवरी को दोपहर ढाई बजे इंटरनेट की मार्फत उसके फोन पर कॉल आई। कॉल करने वाले कहा कि साहिब सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई है।
कुछ देर बार फिर कॉल आई तो फोन करने वाले ने साहिब की दुर्घटना में मौत के बारे में बताया। लेकिन फोन करने वाले ने अपनी पहचान नहीं बताई। उसके बाद उसने साहिब सिंह के मामा के बेटे गुरबचन सिंह को फोन करके दुबई में साहिब सिंह के बारे में पता करने के लिए कहा, जोकि जबलअली से 300-400 किलोमीटर दूर दुबई में ही रहता है। उधर, गुरबचन सिंह को साहिब के बारे में अभी तक कुछ पता नहीं चला। साहिब कंपनी की ओर से तंग किए जाने की बात हर बार करता था। साहिब सिंह के सिर पर ही परिवार का दारोमदार था। क्योंकि उसके सिर पर पिता का साया नहीं है और वह बड़े भाई झिरमल सिंह की मौत के बाद उसका परिवार भी पाल रहा था।
साहिब सिंह अपनी पत्नी जसविंदर सिंह और दो बेटों के अलावा अपने बड़े भाई के चार बच्चों का भी पेट पाल रहा था। साहिब सिंह की मां बचन कौर भी साहिब सिंह के बारे में पूछ-पूछ कर रो रही है। बेशक साहिब सिंह के रिश्तेदार व दोस्त गमजदा हैं, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि साहिब सिंह जिंदा है। रणजीत सिंह ने कहा कि पांच दिन बाद भी साहिब सिंह की मौत या जिंदा होने की कोई खबर नहीं है, पुष्टि के लिए परिवार की तरफ से दुबई जाने के लिए वीजा अप्लाई किया है।