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स्वाइन फ्लू : 12 दिन में बदले 6 अस्पताल, फिर भी नहीं बचा सके बेटे को

6 वर्ष पहले
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जालंधर। बसंत पंचमी में सारा दिन ठंड में ही अजय पतंग उड़ाता रहा। मैं कहता भी रहा कि बेटा- ठंड लग जाएगी। बीमार हो जाएगा। हुआ भी यूं ही। अगले ही दिन बीमार हो गया। बीमार भी ऐसा हुआ कि हमें छोड़कर चला गया। 12 दिन में 6 अस्पताल बदले लेकिन डॉक्टर फिर भी उसे बचा नहीं पाए। जवान 35 साल के इकलौते बेटे की चिता को मुखाग्नि देने के बाद लौटे लाडोवाली के अर्जुन नगर में रहने वाले पिता सुभाष चंद्र बावा ने ये बताया।
सुभाष कहते हैं- मैं पागल हो जाना, मेरे इको मुंडा सी। तीन भैणा दा इको भरा। ओवी चला गेया। मेरे पोता-पोती दा की बणूं। सुभाष बोले- बेटे अजय को मना किया था कि बस कर ठंड में पतंगबाजी बहुत हो गई। उस समय नहीं माना। बीमार हो गया। 24 जनवरी को तो कुछ नहीं हुआ। अगले ही दिन सुबह पहले बेटे की दवा लेकर आया। आते ही मां से बोला-मां मेरा सारा शरीर दुखदा पैया, ठंड लग रेई ए। मां ने देखा तो तेज बुखार था। 103 डिग्री। तीन रजाइयां दी, हीटर भी लगाकर दिया। लेकिन वह कांप रहा था। अगले दिन 26 जनवरी को बेटी इंदू रानी घर आई। उसकी चार महीने पहले ही गोल मार्केट में शादी हुई है-सुभाष बताते हैं। बताया कि बेटी ने आकर उसे घर में ही ड्रिप लगवाई। उसी दिन शाम को बोला-दर्द हो रही है। सांस रुक गया। घरवाले घबराए। तभी उसे लेकर गुरु नानक मिशन अस्पताल की तरफ भागे।
रात के पौने तीन बज चुके थे। वहां से टैगोर अस्पताल रेफर किया गया। वहां एक रात रखा। बिल मोटा बन रहा था। वहां से रिश्तेदार के कहने पर अगले दिन पिम्स ले आए। उन्होंने 10-15 मिनट ही रखा। बोले- यहां से कहीं और ले जाओ। वह पिम्स के साथ ही लगते एसजीएल चेरिटेबल अस्पताल ले गए। रोते हुए पिता बोले-एसजीएल वाले ने तो गाड़ी से भी उतरने नहीं दिया। उन्हें बाहर से ही रेफर कर दिया। वह लोग अजय को ऑक्सफोर्ड अस्पताल ले गए। उन्होंने रात रखा। कहा कि हालत गंभीर है। मरीज को सीएमसी लुधियाना ले जाओ।

सीएमसी पहुंचने से दो-ढाई किलोमीटर पहले ही ऑक्सीजन खत्म हो गई। उन्होंने किसी तरह अजय को पंप किया। हाथ से। दिल को हाथ से धक्का देते-देते अस्पताल तक पहुंचाया। वहां भी पहले डॉक्टरों ने मरीज को लेने से मना कर दिया। पांच हजार रुपए हमने जाते ही जमा करवाए दिए थे। कहने लगे वेंटीलेटर नहीं है। फिर किसी जानकार को फोन करके सीएमओ को बुलाया। उन्होंने मिन्नतें करवाने के बाद बेटे को दाखिल कराया। 2 फरवरी को वह लोग सीएमसी में दाखिल हो पाए। 3 फरवरी को स्वाइन फ्लू का सेंपल लेकर टेस्ट किया गया।
तीन बहनों का इकलौता भाई दो बच्चों का पिता था
तीन बहनों का इकलौता भाई था अजय। उसकी शादी छह साल पहले 2009 में मुकेरियां के गांव पंड़ोरी की रहने वाली ज्योति बाला के साथ हुई थी। उसकी चार साल की बेटी यशिका और सवा साल का बेटा नूर कुमार बावा है। पिता सुभाष कहते हैं कि मैं खुद इंवर्टर का काम करता हूं और बेटा अजय बिजली के मीटर घरों को बाहर लगाने वाली कंपनी के साथ काम कर रहा था। उसे कट कटा कर छह हजार रुपए ही मिल रहे थे।
शहर में तीसरी मौत
स्वाइन फ्लू से शहर में तीसरी मौत हो गई है। शनिवार को स्वाइन फ्लू के लक्ष्ण पाए जाने वाले तीन बच्चों लांबड़ा की ढाई साल की एकम, कपूरथला के शेखां मार्केट के पांच साल के पार्थ और लोहियां खास के पांच साल के सन्नी को भी सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दाखिल किया गया है।
जिला एपिडेमोलॉजिस्ट डॉ. सुभाष चंद्र सूद कहते हैं कि अजय की मौत के बाद उसे सीएमसी अस्पताल में किट में पैक करके परिवार को सौंप दिया गया था। रात को दो बजे उसकी मौत हुई और उसका शव जालंधर पहुंचते ही तुरंत श्मशानघाट में संस्कार कर दिया गया है। परिवार के लोगों पर भी नजर रखी जा रही है। फिलहाल किसी में ऐसे लक्षण नहीं पाए गए हैं।