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बलात्कार करने वालों को फांसी के तख़्ते पर लटका दो: बादल

9 वर्ष पहले
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विशेष संवाददाता, चंडीगढ़।

शिरोमणि अकाली दल के फांसी की सजा के स्टैंड के विपरीत बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के लिए मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल ने मौत की सजा तय करने की वकालत की है। साथ ही कहा है कि ऐसे दोषियों को रहम की अपील का उपबंध भी खत्म कर दिया जाना चाहिए। काबिले गौर है कि पार्टी का स्टैंड केपिटल पनीशमेंट के खिलाफ है।


जस्टिस जेएस वर्मा की अध्यक्षता वाले वर्मा आयोग को अपनी राय भेजते हुए बादल ने ऐसे केसों की जांच, पैरवी और सुनवाई को तेज करने की आवश्यकता पर बल दिया है। धारा 376 (1) और (2) अधीन दर्ज होने वाले बलात्कार के केसों के लिए बादल ने कहा कि मौत की सजा उन केसों में अनिवार्य बनानी चाहिए जिन केसों में बलात्कार के बाद पीडि़त का कत्ल कर दिया गया हो। उन्होंने कहा कि शारीरिक शोषण के केसों को गैरजमानती करार दिया जाए और इनमें कम से कम सजा दो वर्ष और अधिक से अधिक सात वर्ष तय की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि हिरासत में होने वाले ऐसे केसों के लिए दस साल की सजा तय की जानी चाहिए।


डेडिकेटेड कोर्ट और टोल फ्री नंबर पर भी जोर


महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की सुनवाई तेज ढंग से करने की वकालत करते हुए बादल ने कहा, इस तरह ही पीडि़त और उसके परिवार को न्याय दिया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा ऐसे केसों के शीघ्र निपटारे के लिए डेडिकेटेड अदालतें स्थापित की जानी चाहिएं जिनमें इन केसों की सुनवाई समयबद्ध तरीके से की जाए। ऐसे केसों की शीघ्र और निष्पक्ष जांच के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक टोल फ्री नंबर चालू करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे महिलाओं के खिलाफ जुर्म को बिना किसी समस्या के सामने लाया जा सकता है। बादल ने कहा कि महिला पुलिस अधिकारियों की देखरेख अधीन स्थापित किए जाने वाला यह नंबर देश भर में प्रत्येक जिला कंट्रोल रूम पर स्थापित किया जाए। जैसे ही इस पर कोई शिकायत आए तो उसको संबंधित पुलिस थाने को भेजा जाए और उसकी एक कॉपी संबंधित जिला पुलिस प्रमुख को भी भेजी जाए।