(पिछले साल भगत का जन्मदिन मनाती प्रकाश कौर।)
टोरंटो/होशियारपुर। प्रकाश कौर 12 बरस की थीं, जब भगत सिंह ने 23 मार्च 1931 को शहादत पाई थी। उसके बाद से वे हर साल शहीद-ए-आजम के जन्मदिन पर 28 सितंबर को किसी न किसी कार्यक्रम में जरूर जातीं। कुछ सालों से वे नहीं जा सकीं। बीमार रहने लगी थीं। वे टोरंटो के एक अस्पताल में भर्ती थी। उन्होंने वहीं भगत सिंह के 107वें जन्मदिन का केक काटा। इसके बाद उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई। रात करीब 3:45 बजे उनका निधन हो गया। वे 95 वर्ष की थीं। उनका अंतिम संस्कार कनाडा में रविवार को किया जाएगा।
लायलपुर जिले के खासड़ियां गांव (अब पाक में) में 1919 में जन्मी प्रकाश कौर आठ भाई-बहनों में आिखरी थीं। सबसे बड़े कुलवीर सिंह, अमरकौर, भगत सिंह, कुलतार सिंह,
रणवीर सिंह, रजिंदर सिंह और सबसे छोटी बहन शकुंतला का पहले ही निधन हो चुका है।
शख्सियत एेसी कि सुप्रीम कोर्ट में जजों ने उठकर स्वागत किया
1989 में प्रकाश की बेटी गुरजीत कौर के देवर कुलजीत सिंह को फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया था। पंजाब में किसी ने नहीं सुनी तो प्रकाश कौर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। बेंच के जजों को जब पता चला कि वे भगत सिंह की बहन हैं तो वे सम्मान में खड़े हो गए। यह पहली बार था, जब सुप्रीम कोर्ट में जजों ने किसी याची का खड़े होकर अभिनंदन किया।
ताम्रपत्र से किया गया था सम्मानित
भगत सिंह के अलावा पूरे परिवार ने भी देश की आजादी में योगदान दिया है। पिता किशन सिंह, चाचा अजीत सिंह सहित पूरे परिवार ने मूवमेंट में काम किया है। इसी कारण सरकार ने उनकी मां विद्यावती को "पंजाब माता' का खिताब दिया था। 23 मार्च 1972 में प्रकाश कौर को ताम्रपत्र से सम्मानित किया था।
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