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शहीद ए आजम की बहन को मलाल था भाई के सपनों का देश नहीं बना

7 वर्ष पहले
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बठिंडा। इसे इत्तेफाक ही कहेंगे कि शहीद-ए-अाजम भगत सिंह की सगी बहन बीबी प्रकाश कौर का 28 सितंबर काे भगत सिंह के जन्म दिन पर इंतकाल हुआ। वह कनाडा के टोरंटो मंे रह रही थी। बीबी प्रकाश की मौत पर दुखी होकर अपने टोरंटो विजिट की याद साझा करते हुए केंद्रीय यूनिवर्सिटी के प्रो.डॉ.चमन लाल ने कहा, भगत सिंह की बहन को इस बात का अंत तक मलाल रहा कि जैसे भारत का निर्माण भगत करना चाहता था वो हो नहीं सका। लेकिन उनको ये भी यकीन था कि जिस सपने के लिए उनके भाई ने अपनी जिंदगी कुर्बान की, वो कभी न कभी जरूर पूरा होगा। देरी से ही सही लेकिन भगत सिंह का सपना जरूर पूरा होगा।
जिंदगी के अंतिम पड़ाव में प्रकाश कौर के चेहरे पर शहीद भगत सिंह की बहन होने का गर्व दिखाई दे रहा था। उन्होंने कहा कि इस बात का दुख है कि शहीद भगत सिंह के परिवार की अंतिम निशानी भी चली गई। बताया कि बीबी प्रकाश कौर 94 साल की थीं। वे छह सालों से बेड पर ही थी। और किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। प्रकाश कौर अपने बेटे रुपिंद्र सिंह के साथ कनाडा में रहती थी। भगत सिंह के परिवार की वो अंतिम निशानी थी।
बीबी प्रकाश ने भी लिया था जंग-ए-आजादी में भाग
शहीद-ए-आजम भगत सिंह की बहन प्रकाश कौर ने जंग-ए-आजादी में भी भाग लिया था। भगत सिंह के भतीजे अभय सिंह संधू ने बताया कि प्रकाश कौर न सिर्फ क्रांतिकारियों का हौसला बढ़ाती थीं, बल्कि कई आंदोलनों में उन्होंने भाग भी लिया। अभय सिंह संधू कहते हैं कि उनके बुजुर्ग बताते थे कि प्रकाश कौर भगत सिंह से छोटी थी, इसलिए उनकी लाडली भी थीं। दोनों भाई बहनों में बहुत प्यार था। प्रकाश कौर के निधन के साथ ही उनके परिवार में एक युग का अंत सा हो गया लगता है, क्योंकि उनके बाद अब भगत सिंह के भाई बहनों में से अब कोई भी फिजिकली जिंदा नहीं रहा।
यह फोटो तब का है जब केंद्रीय यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉक्टर चमन लाल कनाडा में भगत सिंह की बहन प्रकाश कौर का हाल-चाल जानने के लिए गए थे। इस दौरान प्रकाश कौर ने उन्हें बताया था कि भगत सिंह जैसे भारत का निर्माण चाहते थे, वैसा आज तक नहीं हो पाया है, जिसका उन्हें मलाल है।
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