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चुनाव के मौके पर बनाए करोड़ों नीले कार्ड, अब होगी जांच

7 वर्ष पहले
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बठिंडा. लोकसभा चुनाव से पहले पंजाब में बनाए गए नई आटा दाल स्कीम के कार्डों की अब वेरिफिकेशन कराई जाएगी। इसके लिए चीफ सेक्रेट्री सर्वेश कौशल ने 24 सितंबर को हर जिले के फूड कंट्रोलर को बुलाया है। डीएफएससी (डिस्ट्रिक्ट फूड सप्लाई कंट्रोलर) से इस मीटिंग में नए बनाए गए 15 लाख आटा दाल कार्डों की जांच के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।

दैनिक भास्कर में 18 सितंबर को “बादलों के हलके में बना दिए 8226 फर्जी आटा दाल कार्ड’ खबर छपने के बाद डिप्टी सीएम ने इसका नोटिस लेते हुए जांच के आदेश दिए थे। मौड़ क्षेत्र में बनाए गए हजारों आटा दाल कार्डों में न तो किसी के साइन थे न ही मुहर। राशन डिपो की मुहर लगाकर ही नीले कार्ड जारी कर दिए गए। और तो और इन कार्डों पर अब तक करोड़ों रुपए का राशन बंट चुका है, रहा है।

डिप्टी सीएम ने दिए 15 लाख कार्डों की जांच के आदेश
आटा दाल स्कीम के तहत पहले 17 लाख लोग लाभ ले रहे थे। फरवरी 2014 में नई आटा दाल योजना लांच हुई तो सरकार ने करीब 15 लाख कार्ड बना दिए। मगर, लोकसभा चुनाव से पहले बने कार्ड की लोगों की वेरिफिकेशन तक नहीं की गई।

डिपार्टमेंट ने भी इनकी जांच करनी तो दूर, जारी किए गए कार्डों की तस्दीक करना भी जरूरी नहीं समझा। मौड़ और तलवंडी साबो हलके के हजारों कार्ड तो ऐसे हैं, जो डिपो होल्डरों के पास ही पड़े हैं, बस लोगों को उन पर राशन जारी किया जा रहा है।
आचार संहिता से 10 दिन पहले बंटे थे कार्ड
30 अप्रैल को हुए लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता 5 मार्च 2014 को लागू हुई थी। मगर इससे ठीक 10 दिन पहले 24 फरवरी 2014 को मौड़ हलके में 8264 ऐसे कार्ड जारी किए गए, जिन पर किसी के साइन ही नहीं थे। इनमें से मौड़ मंडी में 5409 कार्ड जारी हुए। कोटफत्ता में 1530 और माइसरखाना में 1323 कार्ड जारी किए गए। इसके बाद इन पर मार्च 2014 में 5970 क्विंटल अनाज भी जारी कर दिया गया। इसकी कीमत करीब 1 करोड़ है।