जालंधर. 21 नवंबर का दिन मैं कभी नहीं भूल सकती। मैं छोटे भाई सुमीन के साथ ट्यूशन से लौट रही थी। गुरु गोबिंद सिंह एवेन्यू से अजीत नगर रोड पर अभी चढ़े ही थे कि देखा पीछे से एक तेज रफ्तार महिंद्रा गाड़ी जिसका म्यूजिक तेज था और गाड़ी इधर-उधर डोलती आ रही है। गाड़ी की रफ्तार देखकर हम डर गए। मैंने सुमीन को गाड़ी डिवाइडर के पास खड़े करने को कहा। सोचा - गाड़ी निकल जाएगी तो चले जाएंगे, लेकिन ड्राइवर ने पीछे से सीधे हम पर गाड़ी चढ़ा दी। मैं तो वहीं गिर गई, लेकिन एक्टिवा चला रहे भाई को गाड़ी 100 फीट तक घसीटती ले गई। मेरी दोनों टांगें ऐसे सुन्न हो गई, जैसे कट गई हों। 20 मिनट तक मेरे मुंह से आवाज नहीं पा रही थी। भाई को दूर गिरे देख रही थी। वहां से लोग भी गुजरते गए, लेकिन किसी ने उठाया नहीं। फिर एक युवक आया, जिसके फोन से मैंने मां को फोन किया। भाई के सिर, चेहरे, टांगों और हाथों पर कई जगह चोटें लगी थीं। सड़क पर खून ही खून था। हादसे के बाद ड्राइवर गाड़ी लेकर भाग गया। उसकी हैडलाइट व बंपर का कुछ हिस्सा वहीं गिर गया था। ये कहना है बलदेव नगर के रहने वाले कोरियाई इंजीनियर ली जेव की 12वीं क्लास की स्टूडेंट बेटी ली सन्नी का।
घटना को याद करते हुए वह एक बार तो रो ही पड़ीं और कुछ संभल कर बोली गाड़ी का म्यूजिक बहुत तेज था। वह देखकर डर गए थे और उन्होंने भाई को रोक दिया। उन्हें नहीं पता था कि ड्राइवर रुकने पर भी उन्हें टक्कर मार देगा।
वहीं, पिता ली-जेव ने बताया कि ओर्थो डॉक्टर ने कहा है कि एक महीने तक बेटी भी बैड से नहीं उठ पाएगी। उसके घुटने का ऑपरेशन होना है। उन्होंने बेटी की प्रभावित हो रही पढ़ाई पर भी चिंता जताई।