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बैंक में लगी आग तो लोगों की फूली सांस, पूरा कैश सेफ फिर भी 50 लाख खाक

7 वर्ष पहले
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जालंधर. स्टेट बैंक की मेन ब्रांच की पहली मंजिल पर रिटेल लोन शाखा में शनिवार देर रात आग लग गई। तड़के करीब पौने पांच बजे धमाका हुआ तो गार्ड को आग का पता चला। करीब 50 लाख रुपए का नुकसान हुआ है।

गार्ड ने फायर ब्रिगेड को फोन किया तो करीब 15 मिनट तक किसी ने फोन ही नहीं उठाया। बैंक की हॉटलाइन से पुलिस को फोन किया। पुलिस ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी, जिसके 15 मिनट बाद करीब सवा पांच बजे फायर ब्रिगेड पहुंची। एक घंटे में आग बुझी। आग से सेंट्रल एसी, करीब 30 कंप्यूटर, लैंडलाइन फोन, फर्नीचर और प्रोसेसिंग फाइलें जल गईं। बैंक का सारा कैश और लॉकर ग्राउंड फ्लोर पर थे, जो सुरक्षित हैं। एजीएम एसके वर्मा और सिक्योरिटी गार्ड सतनाम सिंह ने धुआं निकालने के लिए शीशे तोड़े। सतनाम सिंह के पैर पर कांच भी लग गया, जिससे वह जख्मी हो गया।
फायर सिस्टम था, धुएं में किसी ने चलाने की हिम्मत नहीं की
मुलाजिमों ने बताया कि बैंक में आग बुझाने वाला फायर सिस्टम था, मगर किसी मेंे चलाने की हिम्मत नहीं पड़ी। चूंकि धुआं बहुत ज्यादा था। फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची। उससे पहले मेन गेट खुलवा दिया था। एसबीआई जनरल इंश्योरेंस की बिल्डिंग के रास्ते टीम लोन शाखा गई। वहां से धुआं कम था, जिसके चलते पानी डाला गया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग से पूरी शाखा जल गई। शाखा में 50 से ज्यादा मुलाजिमों का स्टाफ बैठता था। आग के कारणों का पता नहीं चल सका, चूंकि एजीएम का कहना है कि रात को शाखा का मेन स्विच बंद करके जाते हैं। सीसीटीवी में धुआं ही नजर आ रहा था।
लॉकर धारक पहुंचे बैंक
आग की सूचना शहर में फैलते ही कुछ लॉकर धारक बैंक पहुंचे। हालांकि लॉकर रूम ग्राउंड फ्लोर पर है। फिर भी लोग देखने के लिए आ रहे थे कि लॉकर सही है या नहीं। एजीएम एस.के वर्मा ने बताया कैश और लॉकर दोनों सेफ हैं।
चार महीने लगेंगे रिबिल्ट में
एजीएम जतिंदर गुप्ता का कहना है कि आग से सारे कंप्यूटर जल गए थे। पास हो चुके लोन की सारी फाइलें सही हैं। लोन प्रोसेस की कुछ फाइलें जली हैं। फर्नीचर, सीलिंग, एसी की रिपेयर में चार महीने लग सकते हैं।
ऐसे लगा जैसे बम फटा : मुलाजिम
नाइट ड्यूटी पर तैनात हवलदार सतनाम सिंह और दलबीर सिंह ने बताया कि वह अंदर गेट के पास बैठे थे। सुबह करीब पौने पांच बजे अचानक जोरदार धमाका हुआ। ऐसा लगा जैसे कोई बम फट गया हो। वह ऊपर दौड़े। बालकोनी वाला एरिया बिल्कुल सुरक्षित था। वह लिफ्ट से पहली मंजिल पर गए तो आरएसीपीसी (रिटेल असेट क्रेडिट प्रोसेसिंग सैल) में धुआं ही धुआं था। वह नीचे आए और फॉयर ब्रिगेड को फोन किया। पहले फोन व्यस्त था। बाद में किसी ने उठाया नहीं। उन्होंने तभी हॉटलाइन से पुलिस और अस्सिटेंट जनरल मैनेजर एस.के वर्मा और आरएसीपीसी के एजीएम जतिंदर गुप्ता को फोन किया। तभी दोनों एजीएम आ गए। पहले बिजली की सप्लाई बंद की और शीशे तोड़े, ताकि धुआं निकल सके।
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