जालंधर. काम के दौरान हाथ खो चुके नाइजीरियन नौसेना के वाइस कैप्टन रॉबिनसन सैमुअल दोबारा हाथ ठीक होने की उम्मीद भी खो चुके थे। लेकिन उसकी उम्मीद को फिर से जिंदा किया जालंधर के केजीएम बोन अस्पताल के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. कुलवंत सिंह ने। उन्होंने सैमुअल को मायो इलैक्ट्रिक हैंड लगा दिया है। जिसके बाद सैमुअल अब दोबारा काम पर लौट सकेगा।
सेंसर और कंप्यूटराइज्ड मशीन से चलने वाले इस हाथ से वह नॉर्मल इंसान की तरह ही काम कर पाएगा। वह हाथ लगवा कर काफी उत्साहित है। बैटरी से चलने वाले इस हाथ से वह न केवल सात किलोग्राम तक का बोझ उठाने के काबिल बन गया है, बल्कि वह लिख भी सकता है। सैमुअल ने इस दौरान डॉक्टर को सिग्नेचर करके दिखाए। दो हफ्ते के वीजा पर जालंधर आए सैमुअल नया हाथ लगने के बाद रविवार को चंडीगढ़ से फ्लाइट पकड़कर नाइजीरिया लौट गए।
काम करने वालों ने बताया जालंधर का पता
सैमुअल का इसी साल 11 मार्च को सामान उतारते वक्त कंटेनर में फंसकर हाथ कट गया। वह तुरंत अस्पताल नहीं पहुंच सका। इससे हाथ दोबारा जोड़ा नहीं जा सका। उसके साथ काम करने वाले कुछ लोग जालंधर में डॉ. कुलवंत को जानते थे। उन्होंने डॉक्टर से ऐसी तकनीक के बारे मंे कभी बात की थी। सैमुअल उनके जरिए यहां पहुंचा।
कैसे काम करता है मायो इलैक्ट्रिक हैंड
डॉ. कुलवंत सिंह के मुताबिक मायो इलैक्ट्रिक हैंड लगाने के लिए बाजू के मसल ठीक होने जरूरी है। क्योंकि बाजू के मसल ही हाथ को चलाते हैं। आर्टिफिशियल कंप्यूटराइज्ड हैंड के अंदर सेंसर लगे होते हैं। जो मसल के जरिए ब्रेन तक पहुंचने वाले सिग्नल को पिकअप करता है। सेंसर पिकअप किए सिग्नल को आगे कंप्यूटराइज्ड मशीन तक पहुंचाता है। कंप्यूटर इसे ट्रांसलेट कर हाथ को मोशन और मूवमेंट देता हैं।
24 घंटे में सेंसर और मसल में बैठाया तालमेल
डॉ. कुलवंत ने बताया कि आम तौर पर मायो इलैक्ट्रिक हैंड को लगाने के बाद सेंसर और मसल में तालमेल बैठने को एक महीने तक का समय लग जाता है। लेकिन सैमुअल के मसल अच्छे थे और उन्होंने 24 घंटे में ही कवर कर लिया। जर्मनी से मंगवाए गए हाथ को आगे यहीं असेंबल किया जाता है। क्योंकि यह देखना बहुत जरूरी होता है कि हाथ कितना और कैसे कटा है। मसल कितने बचे हैं और कितनी जल्द काम कर सकते हैं। उसे से सही मूवमेंट हो सकती है।
डॉ. कुलवंत सिंह को हाथ की मूवमेंट दिखाकर खुश होते सैमुअल।