जालंधर. शहर में सड़कों की दशा से हर कोई वाकिफ है। अगर कोई वाकिफ नहीं है तो वह है निगम प्रशासन। निगम प्रशासन जाए जाए इसके लिए लोगों ने समय-समय पर प्रदर्शन किए। लेकिन सड़कें नहीं बनीं अब निगम अधिकारियों को एक और बहाना मिल गया है। बारिश हो गई है और सर्दी बढ़ गई है, सड़क बनाएंगे तो टूट जाएंगी। गर्मियों का इंतजार कीजिए। यही क्रम पिछले तीन साल से चल रहा है।
पहले बरसात के कारण सड़कें नहीं बनी। फिर सर्दी से पहले टेंडर लगाने और काम शुरू करने में देरी हुई। अभी शहर की बाहरी 6 रोड्स ही बन सकी थीं कि सर्दी ने जोर पकड़ लिया। इससे बिटुमिन गर्म करना और उसका बजरी से जोड़ बनना मुश्किल है। वैसे भी सर्दियों में बिटुमिन के प्लांट बंद हो जाते हैं। ऐसे में सड़क का मटीरियल मंगवाना मुश्किल है। वहीं, नगर निगम की बीएंडआर ब्रांच से पता चला है कि सिटी की 20 टूटी सड़कें बनाने के लिए बीते महीने निगम हाउस ने मंजूरी दे दी थी। इसके लिए 25 करोड़ के टेंडर भी लगे। लेकिन ठेकेदारों को पेमेंट लेट कर दी गई।
फिर राज्य सरकार से 10 करोड़ रुपए आने की आस बंधने पर ठेकेदार काम के लिए तैयार हुए। कुछ ठेकेदारों ने आधा दर्जन सड़कों के 30 से 50 लाख रुपए तक के काम भी करवाए लेकिन ज्यादा बजट वाली सड़कों पर अभी तक काम शुरू ही नहीं हुआ। अब प्लांट अगले साल मार्च महीने में तापमान बढ़ने के बाद ही शुरू होंगे।
कोहरे में बढ़ा हादसों का खतरा
मैंजीजीएस एवेन्यू में रहता हूं। मकसूदां मंडी में मेरा कारोबार है। ऑफिस से घर आने-जाने तक टूटी सड़कों पर इतने झटके लगते हैं कि शरीर दुखने लगता है। पहले तो रोशनी होती थी, रात को गड्ढे दिख जाते थे। कोहरे में विजिबिलिटी बहुत कम होती है। रात को चलना तो जान को खतरे में डालने जैसा है। - राजीव धमीजा, कारोबारी
करोड़ों का टैक्स, मंडी रोड टूटी
मंडी रोड पिछले चार साल से बुरी तरह से टूट चुकी है। रेलवे रोड तो बन गई है लेकिन जिस सड़क से करोड़ों का राशन सप्लाई होता है, वो नहीं बनी। साल में करोड़ों रुपया टैक्स देने का दुकानदारों को क्या फायदा। निगम से गुजारिश है कि हमारी समस्या दूर करे। -
राजेशकुमार सोनी, कारोबारी
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