पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Daughters Future Was Wasted For Fear In Shergarh

दरिंदगी के डर से बर्बाद हो रहा बेटियों का भविष्य, पढ़ाई छुड़वा करवाई जा रही है शादी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
शेरगढ़ (तलवंडी साबो). तलवंडी साबो के शेरगढ़ में बेटियों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। वजह, घर से स्कूल दूर होने के कारण घरवालों ने कई लड़कियों की पढ़ाई छुड़वा दी है। ऐसी ही कई लड़कियां स्कूल छूटने के बाद या तो गांव में सिलाई सीख रही हैं, या फिर परिवार वालों ने उनकी शादी कर दी है।

शेरगढ़ गांव के पंचायत मेंबर जरनैल सिंह की बेटी नवदीप आठवीं के बाद स्कूल छोड़कर घर बैठ गई। गांव का स्कूल मिडल तक है। हाई स्कूल नवदीप के गांव से छह किलोमीटर दूर मेहता में है। यहां जाने के लिए न तो उसके पास कोई साधन है। और न ही गांव के प्राइवेट स्कूल की सात सौ रुपए महीना फीस भरने की परिवार की हैसियत है। एससी जाति के जरनैल सिंह आस-पास के गांव में मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। जरनैल चाहते हैं कि उसकी बेटी पढ़े। लेकिन कैसे? इतनी छोटी बच्ची को अकेले दूसरे गांव में पैदल भेजते हुए डर लगता है। बस का समय स्कूल से मैच नहीं करता। लिहाजा घर बैठने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं है। इसी तरह मलकीत सिंह की बेटी सिमरजीत कौर ने भी स्कूल छोड़ दिया है। मनजीत कौर, लवदीप कौर भी अब घर बैठीं हैं। जसविंदर कौर, सुखप्रीत कौर, परमजीत कौर, अमनदीप कौर, गुरप्रीत कौर ऐसे कई नाम हैं, जो हाई स्कूल न जा पाने के कारण अब घर बैठ गई हैं। या फिर गांव के सिलाई सेंटर में सिलाई का काम सीख रही हैं। नवदीप की दादी मनजीत कौर बताती हैं आए दिन लड़कियों के साथ दरिंदगी की खबरें आती हैं। ऐसा कुछ होने से अच्छा है हम बेटियों को घर ही बिठा लें।
हरसिमरत ने भी नहीं सुनी : मनजीत कौर
स्कूल को अपग्रेड करवाने की मांग क्यों नहीं की? इस सवाल पर पंच जरनैल सिंह बताते हैं, हमारी तो सरकार से सबसे बड़ी मांग ही यही है। पर सुनता कौन है? मनजीत कौर ने कहा, मैंने तो सांसद हरसिमरत बादल को भी बस अड्डे के पास इस मुद्दे पर घेर लिया था। और कहा था कि स्कूल दसवीं तक करवाए। पर वह बोली, नहीं हो सकता क्योंकि आपके गांव के छह किलोमीटर के भीतर सरकारी स्कूल है।
पढ़ाई छूटने पर छोटी उम्र में कर रहे हैं शादी
बस सर्विस के बारे में पूछने पर गांव का ही मलकीत सिंह बताता है प्राइवेट बस चलती है। जिन्होंने जानबूझकर स्कूल टाइम से अपना टाइम पीछे कर लिया है। ताकि बच्चों को न ले जाना पड़े। जसविंदर ने बताया, बच्चियों को घर में बिठाने के बजाय लोग छोटी उम्र में ही इनकी शादियां कर रहे हैं। शेरगढ़ गांव के हेड टीचर ने इस साल सात बच्चों के घटने के कारण बताते हुए जो रिपोर्ट डीईओ बठिंडा को भेजी है उसमें छठी क्लास की एक लड़की सरोज रानी की शादी होना लिखा है।
क्या है स्कूल अपग्रेड नॉर्म्स
स्कूल पांच साल से पुराना होना चाहिए। बच्चों की गिनती लगातर बढ़नी चाहिए। 3 किलोमीटर के भीतर उसी लेवल का कोई दूसरा सरकारी स्कूल नहीं होना चाहिए। हाई स्कूल छह किलोमीटर के दायरे से बाहर नहीं होना चाहिए।
स्कूलों को अपग्रेड करने के नॉर्म्स में ये स्कूल नहीं आते। इन गांवों मंे बच्चों की गिनती भी पर्याप्त नहीं है। हां, लड़कियों के स्कूल छोड़ने की समस्या गंभीर है। मैं गांव वालों के साथ जिला प्रशासन से इस मुद्दे पर बात करूंगा। - शिवलाल, डीईओ एलिमेंटरी