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डाउनलोड करेंजालंधर. डीएवी कॉलेज जालंधर और हिंदू कॉलेज अमृतसर के प्रिंसिपल रह चुके प्रो. सीएल अरोड़ा का इतवार को निधन हो गया। वह 93 साल के थे। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था। सोमवार को यहां अंतिम संस्कार किया गया। जांबिया की टेलीकॉम कंपनी में कार्यरत उनके बेटे सुधीर अरोड़ा ने मुखाग्नि की। उनकी बेटी प्रो. वीना भी अमृतसर कॉलेज में प्रिंसिपल पद से रिटायर हो चुकी हैं। प्रो. अरोड़ा ने उन्हीं के पास इतवार को अंतिम सांस ली। रस्म उठाला 28 जनवरी को दो बजे से डीएवी कॉलेज के ऑडिटोरियम में होगा।
साइंस फैकल्टी में वह अपनी किताब के लिए जाने जाते थे। बीएससी फिजिक्स। यूं तो यह एक हेल्प बुक थी। दक्षिण एशिया में भारत समेत सभी देशों में प्रो. अरोड़ा की ये किताब फिजिक्स पढऩे वाले छात्रों के लिए बेहद जरूरी मानी जाती थी। डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बीबी शर्मा कहते हैं-उन्होंने कई पीढिय़ों को इस किताब के जरिए फिजिक्स सिखाई। एचएमवी की प्रिंसिपल डॉ. रेखा कालिया कहती हैं-वह एक आदर्श अध्यापक थे। फिजिक्स कैसे आसानी से समझी जा सकती है, प्रो. अरोड़ा ने बताया। डीएवी के प्रिंसिपल पढ़ाने का समय कम ही निकाल पाते थे। मगर प्रो. अरोड़ा ने प्रिंसिपल रहते भी पढ़ाना नहीं छोड़ा। उन्हीं के साथी रह चुके प्रो. ठाकुर बलवंत सिंह याद करते हैं।
जिसने भी प्रो. अरोड़ा से पढ़ा, वह उनका मुरीद हो गया। डीएवी के फिजिक्स डिपार्टमेंट में रहे प्रो. देवीदयाल अरोड़ा कहते हैं-सबके साथ उनका प्यार का रिश्ता था। हमने उन्हें कभी भी गुस्सा होते नहीं देखा। बीएससी के लिए किताबें लिखना आसान नहीं। मगर उन्होंने एक ही किताब में बीएससी के सभी
टॉपिक कवर किए। देश की लगभग सभी यूनिवर्सिटियों के छात्र इसे पढ़ते हैं। वह छात्रों में कितने लोकप्रिय थे- प्रो. केके घई एक वाकया सुनाते हैं। डीएवी बीएससी के छात्रों की विदाई पार्टी थी। छात्रों ने प्रो. अरोड़ा को एक 'ट्वायज कारÓ भेंट की। यह कहते हुए कि सर! कॉलेज में आप जितने चक्कर काटते हैं, उससे थक जाते होंगे। प्रो. अरोड़ा का जवाब था- कॉलेज में मैं कभी थकने वाला नहीं। हमने उनके माथे पर कभी शिकन तक नहीं देखी।
प्रो. अरोड़ा ने प्रिंसिपल का चार्ज प्रो. भीमसेन बहल से संभाला था। प्रो. बहल डीएवी के दिग्गज माने जाते थे। उनके बाद कुर्सी संभालना बड़ी चुनौती का काम था। उन्होंने अपनी स्पीच में कहा था- किसी एक व्यक्ति का कंधा इतना चौड़ा और मजबूत नहीं होता कि सारा बोझ उठा सके। हम सबको कंधे से कंधा मिलाकर छात्रों को बेहतरीन तालीम मुहैया कराने का मिशन आगे बढ़ाना है। प्रो. घई कहते हैं-अपनी सज्जनता, अनुशासन प्रियता और स्नेहपूर्ण व्यवहार से उन्होंने यह जिम्मेदारी बखूबी निभाई। प्रिंसिपल पद छोडऩे के बाद भी वह डीएवी और आर्य समाज के मिशन को आगे बढ़ाते हैं।
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