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जिस बच्ची को डॉक्टर ने डैड बताया था, 13 साल बाद बुआ ने बाजार में पहचाना

6 वर्ष पहले
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(अमनदीप कौर जिसे डॉक्टर ने मृत बताया था, सुखदीप कौर उसकी जुड़वा बहन )
मुक्तसर / जालंधर। डॉक्टर ने जिस मासूम को मरा घोषित कर दफनाने की बात कही थी, वहीं मासूम 13 साल बाद उसी शहर के बाजार में घूमती मिली। मामला कुछ चौकाने वाला जरूर है पर है सच। बताया जाता है कि शहर की एक महिला ने करीब 13 साल पहले एक निजी अस्पताल में जुड़वा लड़कियों को जन्म दिया था। उसी समय डाक्टर ने परिजनों से कहा कि एक लड़की ती तबीयत खराब है उसका इलाज करा जा रहा है। दूसरे दिन डॉक्टर ने कह दिया कि लड़की मर गई और उसे दफना दिया गया है। परिजनों ने भी उसकी बात मान ली। तेरह साल बाद लड़की की बुआ को बाजार में अपनी भतीजी की हमशक्ल लड़की बाजार में घूमती मिली तो उसका माथा ठनका।
इस तरह हुआ खुलासा
लड़की के पिता गुरतेज सिंह ने बताया, अचानक 13 साल बाद 2007 में सुखदीप की बुआ रूपिंदर कौर को मुक्तसर के बाजार में सुखदीप के साथ मिलती शक्ल वाली एक लड़की दिखी। रूपिन्दर कौर ने पड़ताल की तो पता चला कि लड़की का नाम अमनदीप कौर है। वह तिलक नगर मुक्तसर में कश्मीर कौर के घर उसकी बेटी के तौर पर रह रही है। रूपिंदर को शक हुआ तो उसने आगे जांच की तो पता चला कि कश्मीर कौर ने अमनदीप कौर को जन्म नहीं दिया बल्कि उसको उसी नर्सिंग होम में से गोद लिया है जिसमें दूसरी बच्ची सुखदीप का जन्म हुआ था।
यह है मामला
निजी अस्पताल में जन्मी जुड़वा बच्चियों में से एक को बेचने के आरोप में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मनजिंदर कौर की अदालत ने डॉक्टर, नर्स और खरीदार महिला को तलब किया है। आरोप है, इनकी मिलीभगत से बच्ची बेची गई है। पीड़ित पक्ष के गुरतेज सिंह निवासी गांव भुल्लर और वकील कमलजीत सिंह हेयर ने बताया कि गुरतेज की पत्नी बलजीत कौर ने 27 दिसंबर 1995 को मुक्तसर के कोटकपूरा रोड स्थित एक नर्सिंग होम में दो जूड़वां बेटियों को जन्म दिया था। 10 जनवरी को नर्सिंग होम के डॉक्टर ने कहा कि एक लड़की की हालत सीरियस है। उसका अलग से इलाज किया जा रहा है और फिर बाद में यह कह दिया गया कि उसकी मौत हो गई है और डैड बॉडी को भी दफना दिया गया है। बच्ची के मां-बाप ने डॉक्टरों की बात पर एतबार कर लिया और एक बच्ची को लेकर गांव चले गए और बच्ची का नाम सुखदीप कौर रख दिया।
कोर्ट की मदद से बेटी घर लाने में भी चार साल लग गए
मामला पुलिस के पास गया तो नर्सिंग होम के प्रबंधक डॉक्टर, एक नर्स और कश्मीर कौर ने कबूल किया कि यह बच्ची गुरतेज सिंह और बलजीत कौर की बेटी ही है। 2007 में ही थाना सीटी में इन तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। 2011 में अदालती मदद से गुरतेज सिंह अपनी बेटी अमनदीप कौर को भी अपने घर गांव भुल्लर में ले आए। गुरतेज सिंह व अन्य ने बताया कि अब उन्हें अभी तक इस मामले में कोई इंसाफ नहीं मिला जिस करके उन्होंने चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मुक्तसर की अदालत में इस्तगासा दायर किया। कोर्ट ने कार्यवाही करते नर्सिंग होम के डाॅक्टर, नर्स और खरीददार को तलब कर लिया है।