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डाउनलोड करेंबठिंडा. जिन चोरी हुईं 84 ग्रिल की पुलिस ने बरामदगी दिखाकर वाहवाही लूटी थी, असल मे वो कभी बरामद ही नहीं हुईं। बल्कि पुलिस ने उसी तरह की नई ग्रिल खरीदकर, रंगरौगन करवाया और उसे चोरी की बता दिया। ये कारनामा किया बठिंडा पुलिस ने। कारण, इस मामले में डिप्टी सीएम ने एसएसपी से जवाब-तलब किया था। यही नहीं, पुलिस ने पहले तो बैक डेट में एफआईआर दर्ज की और फिर मात्र 41 दिन बाद ही चोरी हुए ग्रिल की रिकवरी दिखा दी। इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब निगम अफसर को बुलाकर बरामद ग्रिल की शिनाख्त करवाई गई। निगम अफसर ने पुलिस दबाव में शिनाख्त तो कर दी, मगर पुलिस कार्रवाई पर उन्हें शक हुआ। यहीं से भास्कर ने जांच शुरू की तो मामले का खुलासा हुआ। गौरतलब है कि बठिंडा के जीटी रोड से नवंबर २०१२ में कई ग्रिल चोरी हो गए थे।
ऐसे दिखाई फर्जी रिकवरी
21 दिसंबर 2013 को बठिंडा पुलिस ने जीटी रोड से चोरी हुई 84 ग्रिल बरामद करने का दावा किया। बरामदगी दो कबाडिय़ों से दिखाई गई। जब निगम अफसर ने शिनाख्त की तो उन्हें शक हुआ। जब भास्कर टीम ने जांच की तो खुलासा हुआ कि जो ग्रिल चोरी हुई थी वह तोड़कर चोरी की गई थी, जिनकी दोनों टोंगे टूटी हुई हैं, जबकि जो ग्रिल बरामद दिखाई गईं, वह बिलकुल नई हैं। यही नहीं, चोरी हुई ग्रिल का रंग काला था, जबकि इनका ग्रीन है। अहम बात यह है कि बरामद ग्रिल के डिजाइन में भी अंतर है। इससे पता चलता है कि यह ग्रिल नई तैयार करवाई गई और इनकी बरामदगी दिखा दी गई।
बैक डेट में एफआईआर दर्ज की, 41 दिन बाद दिखाई रिकवरी
12 नवंबर 2013 को डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने करोड़ों रुपए की लागत से लगाई गई ग्रिल चोरी होने के बारे में तत्कालीन एसएसपी रवचरण सिंह बराड़ से इस पर जवाब तलब किया और तत्काल जांच करवाने के निर्देश दिए। तब तक पुलिस ने इस मामले में कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं की थी। मगर डिप्टी सीएम के निर्देश के कुछ समय बाद ही पुलिस ने बैक डेट यानी १० नवंबर २०१३ में एक एफआईआर थाना कैंट में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज कर दी। जबकि नगर निगम इससे पहले दो साल में तीन बार बठिंडा पुलिस को ग्रिल चोरी होने की एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र लिख चुका था।
सीधी बात
डिप्टी सीएम ने ग्रिलों को तलाशने के निर्देश दिए थे। क्या हुआ ?
-84 ग्रिलों की रिकवरी हो गई है।
लेकिन वे तो ब्रैंड न्यू हैं जबकि चोरी हुई ग्रिलें काटी गई थीं ?
-वैल्डिंग करा ली गई होंगी ?
लेकिन डिजाइन भी अलग हैं?
-ये तो मुझे पता नहीं है।
-गुरप्रीत सिंह भुल्लर, एसएसपी
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