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गोधरा दंगों की तुलना 1984 के कत्लेआम से न करें : बादल

7 वर्ष पहले
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मलोट. 1984 में सिखों के कत्लों की तुलना गुजरात के गोधरा में हुए दंगों से करना पूरी तरह गलत है क्योंकि इन दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। यह बात गुरुवार को सीएम परकाश सिंह बादल ने संगत दर्शन के दौरान मीडिया से बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि गोधरा में घटित हिंसा दंगे थे, जबकि 1984 का सिख कत्लेआम केंद्र सरकार के इशारों पर किया गया था। बादल ने कहा कि केंद्र ने मूकदर्शक बनकर सिखों की हत्याएं जान बूझकर होने दीं जोकि एक अपराध है। केंद्र सरकार और पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने से काग्रेंसी नेताओं के नेतृत्व वाली भीड़ ने निर्दोष सिखों के कत्ल किए। जांच में भी काग्रेंसी नेताओं को दिल्ली और देश के अन्य भागों में हुए सिखों के कत्लों का दोषी ठहराया गया था। इन सभी सबूतों के बावजूद इस हिंसा को अंजाम देने वाले आजाद घूम रहे हैं।

सीएम ने फिलीपींस जैसे देशों में पंजाबी नौजवानोंं के कत्लों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र को बाहर रह रहे पंजाबी नौजवानों की जान व माल की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। 'भास्कर' ने विकास कार्यों में कोताही के बारे में 24 जनवरी के अंक में 'करोड़ों की लागत से बनी इमारत से गिर रही हैं टाइलें' खबर की ओर सीएम का ध्यान दिलाया तो पेपर की कॉपी लेते हुए उन्होंने कहा की विकास कार्यों में कोताही बर्दाश्त नहीं होगी और इसकी जांच के बाद कार्रवाई भी होगी।