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डाउनलोड करेंई-ट्रिप, पावर कट और वैट रिफंड में देरी: तीन मुद्दे, जिन्हें लेकर पंजाब के इंडस्ट्रियलिस्ट नाराज हैं। भास्कर टीम ने 4 दिनों में 100 विधायकों से पूछा कि वे कैसे हल ढंूढेंगे इन मसलों का। जानिए क्या आया सामने...
ये तो अनजान हैं हमारे मुद्दों से...
चंडीगढ़/पंजाब। पंजाब की रीढ़ रही स्मॉल स्केल इंडस्ट्री टूटने को है, कारण हैं हफ्ते में चार दिन पावर कट, वैट रिफंड में देरी और अब ई-ट्रिप का फरमान। उद्यमी प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार में बैठे नुमाइंदों को लगता ही नहीं है कि ये इश्यू हैं। ई-ट्रिप क्या है? कई नेता जानते ही नहीं। तरनतारन के विधायक हरमीत सिंह संधू व दिग्गज अकाली विरसा सिंह वल्टोहा इन सवालों पर कहते हैं-'बादल साहब से पूछ लें।' बलाचौर के नंदलाल की सुनिए,'सरकार में समझदार बैठे हैं। वे हल निकाल लेंगे।'
पूर्व आईएएस अफसर फगवाड़ा के विधायक सोमप्रकाश ने माना,'मुझे ई-ट्रिप के बारे में ज्यादा नहीं पता।' खुद भी व्यापारी मानसा के अकाली विधायक प्रेम मित्तल तो ई-ट्रिप को सी-फार्म से जोड़ते हुए कहते हैं-यह केंद्र का मामला है, राज्य सरकार कुछ नहीं कर सकती।' तो क्या इंडस्ट्री पर पावर कट ऐसे ही लगते रहेंगे? पिछली सरकार में इंडस्ट्री मिनिस्टर रहे मनोरंजन कालिया जो समाधान सुझाते हैं, जरा उसे पढि़ए-'इंडस्ट्री को पूरी बिजली देंगे तो फिर आप कहेंगे, घरों में कट लग रहे हैं।' फिर सुझाते हैं-'इंडस्ट्री के लिए बिजली सेंट्रल पूल से खरीदनी चाहिए।'
बंगा के कांग्रेस विधायक त्रिलोचन सूंढ को यह साजिश लगती है। कहते हैं,'शहरों से भाजपा को हटाने के लिए शिअद इंडस्ट्री की अनदेखी कर रही है, ताकि उद्यमी उसके साथ आ जाएं।' कपूरथला के राणा गुरजीत सिंह को पावर कट में घोटाला नजर आता है। कहते हंै-'सरकार प्लांट बंद कर बाहर से बिजली ले रही है, ताकि कंपनियों को फायदा हो।'
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