जालंधर\\मेहतपुर. सिर में गहरी चोट का समय पर इलाज न मिलने पर सिविल अस्पताल से गायब चार महीने की बच्ची मधु की मौत हो गई। बुधवार को भास्कर में खबर छपने के बाद मदद के लिए कई लोग आगे आए थे, मगर मां-बाप पैसे न होने की वजह से उसे साथ ले गए गए। शुक्रवार को बच्ची का पता चला तो अस्पताल शिफ्ट करते उसने दम तोड़ दिया। डीसी कमल किशोर यादव ने मौत की जांच के आदेश दिए हैं।
मेहतपुर गांव के पास संगोवाल की चार महीने की मधु पांच सितंबर को झूले से गिर गई थी। मां खुशबू ने बताया कि दस दिन तक बच्ची का डिस्पेंसरी में इलाज कराया। हालत बिगड़ी तो 15 सितंबर की रात बारह बजे सिविल अस्पताल ले आए। बच्ची को न्यूरो सर्जन की जरूरत थी, जो सिविल अस्पताल के पास नहीं था। नाना नरेश मुनी ने कहा कि बच्ची को पीजीआई ले जाने और न ही न्यूरो सर्जन को बुलाने के लिए 500 रुपए नहीं थे। अस्पताल में एक नर्स ने कहा कि इलाज में तीस हजार रुपए लगेंगे। पैसे नहीं है, तो बच्ची ले जाओ। नरेश मुनी ने कहा कि मंगलवार रात तक सिर्फ ग्लूकोज चढ़ाया गया। बुधवार सुबह जब घर वापस जाने लगे, तो एक डाक्टर ने कहा कि फाइल के दो सौ रुपए सात नंबर खिड़की पर जमा करवा दो। पैसे नहीं थे, इसलिए फाइल साथ ले गए। बच्ची को मेहतपुर में गुरु तेग बहादुर अस्पताल ले गए। डा. संतोष ने बता दिया था कि बच्ची की हालत गंभीर है। पैसे नहीं थे। इसलिए कहीं नहीं लेकर गए। डा. संतोष ने इलाज का कोई पैसा नहीं लिया।
बच्ची को मेहतपुर के प्राइवेट अस्पताल से जालंधर लाते वक्त रास्ते में दम तोड़ दिया।