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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के दविंदरपाल सिंह भुल्लर की पुनर्विचार याचिका स्वीकार कर ली है। शुक्रवार को इस पर खुली कोर्ट में सुनवाई होगी। उसकी पत्नी नवनीत कौर ने कोर्ट से फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की गुहार लगाई है। इससे पहले कोर्ट ने 12 अप्रैल 2013 को भुल्लर की याचिका ठुकरा दी थी। कहा था कि दया याचिका पर फैसले में देरी फांसी माफ करने का आधार नहीं हो सकता।
26 मई 1965 को जालंधर में जन्मे और लुधियाना के गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज से बीई का कोर्स करने वाला दविंदरपाल सिंह भुल्लर गंभीर मानसिक रोग से पीडि़त है। भुल्लर पर सितंबर 1993 में नई दिल्ली में बम ब्लास्ट करने का आरोप है। इसमें नौ लोगों की मौत हुई थी। युवा कांग्रेस के उस समय के अध्यक्ष एमएस बिट्टा समेत 25 लोग हमले में घायल हुए थे।
21 जनवरी के फैसले से जगी उम्मीद
21 जनवरी 2014 को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने पहले सुनाए फैसले को पलट दिया है। इस बार कोर्ट ने दया याचिका पर फैसले में देरी और मानसिक रोगों के आधार पर 15 कैदियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का आदेश दिया है। ऐसे में उम्मीद है कि पुनर्विचार याचिका पर भुल्लर की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला जा सकता है।
कब क्या हुआ?
1993 में दिल्ली में ब्लास्ट का आरोप। 9 की मौत। धमाकों के बाद जर्मनी भाग गया था भुल्लर।
4 में भारत लाया गया। 2001 में फांसी की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सजा बरकरार रखी। पुनर्विचार याचिका व भूल सुधार याचिका भी खारिज।
2003 में दया याचिका लगाई जो 2011 में खारिज हो गई।
21 जनवरी 2014 को 15 कैदियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला
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