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नेक कामः जारी है जोड़ियां मिलाने की कोशिश

9 वर्ष पहले
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जालंधर. होशियारपुर का 22 साल का एक युवक एचआईवी संक्रमित हो गया। बड़े भाई ने उसे घर से निकाल दिया। जालंधर के एआरटी सेंटर में दवा लेने पहुंचे युवक ने अपनी समस्या एनजीओ ‘कोशिश’ के समक्ष रखी। कोशिश के काउंसलर युवक के घर उसके भाई को समझाने के लिए पहुंचे लेकिन वह नहीं माने।
एनजीओ ने उसकी शादी एचआईवी संक्रमित लड़की से ही करवा दी। उसे आर्थिक सहायता भी की। आज वह काफी खुश है और अपना व्यवसाय चला रहा है। कोशिश ने पंजाब में वर्ष २क्१२ में 18 जोड़ों को परिणय सूत्र में बंधवाया है। इनमें जालंधर के छह शामिल हैं। अभी भी कई लड़के शादी के लिए तैयार हैं, लेकिन एचआईवी संक्रमित लड़कियों की संख्या कम होने के कारण शादी नहीं हो पा रही।
कम है लड़कियों की संख्या
एनजीओ कोशिश की नोडल अधिकारी का कहना है कि एनजीओ के पास 150 लड़कों ने शादी के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रखा है, लेकिन लड़कियों की संख्या कम है। इसलिए दूसरे राज्यों से भी संपर्क साधा जा रहा है। जैसे ही लड़की शादी के लिए तैयार होती है तो उसके मुताबिक लड़के को तलाशा जाता है। इसमें जालंधर के 60 युवक हैं।
शादीशुदा लड़की नहीं चाहते
कोशिश के पास अधिकतर केस ऐसे है जिनमें लड़के नहीं चाहते कि लड़कियां शादीशुदा हो। कुछ लड़के मान जाते हैं, लेकिन महिलाओं के बच्चों को अडॉप्ट करने से मना कर देते हैं। कई बार महिलाएं भी दोबारा शादी के लिए तैयार नहीं होतीं।
शादी से पहले होती है काउंसलिंग
एचआईवी संक्रमित मरीजों की शादी से पहले काउंसलिंग होती है। काउंसलिंग के जरिए उन्हें शादी के बाद बचाव की जानकारी दी जाती है। साथ ही समय पर दवा लेने और बच्चे के जन्म संबंधी विशेष जानकारी दी जाती है।