जालंधर। कुछ इन्हीं शब्दों से धुलेता के सुरजीत सिंह लाली पटके की पहली कुश्ती के लिए मिट्टी से मिट्टी हो रहे कृष्ण धुलेता और कमल डूमछेड़ी का उत्साह बढ़ा रहे थे। मौका था - गढ़ी महा सिंह में गुग्गा जाहिर पीर कमेटी की ओर से कराई जा रही वािर्षक छिंज का।
यहां पहलवानों की चुस्ती नापते बुजुर्ग - कुश्ती जोर नहीं, फूर्ति दा खेल है, जैसे हल्लाशेरी वाले शब्दों का खास तौर पर इस्तेमाल करते हैं। सालाना छिंज में इस बार 17 अखाड़े से करीब 150 पहलवान पहुंचे थे। यहां पटके की तीन कुश्तियां हुईं। पहली - कृष्ण धुलेता, कमल डूमछेड़ी। दूसरी - गौरव ऊना, सतिंदर मोहाली। तीसरी - गनी लल्लियां, सतीश आलमगीर। मुख्य पटका जहां बराबरी पर छूटा। वहीं दूसरा पटका सतिंदर मोहाली तो तीसरा - गनी लल्लियां ने अपने माथे पर सजाया। 6 स्पेशल कुश्तियां भी करवाई गई। पटके का पहला इनाम 41 हजार का रहा। देर शाम गायक गीता जैलदार का अखाड़ा लगा।
पहला पटका | नूरमहल में पटका लेने वाले कृष्ण
सोनीपत (धुलेता) के सामने थे मेहतपुर के सिरमौर कमल डूमछेड़ी। शानदार फार्म में चल रहे कृष्ण
सोनीपत ने अपने चिर परिचित अंदाज (अटैक) से शुरू से ही गेम पर पकड़ बना ली। लेकिन अनुभव से सराबोर कमल डूमछेड़ी गेम को बचा ले गए। 15 मिनट में एक समय कमल ने कृष्ण को ढहा लिया लेकिन पीठ लगाने में सफल नहीं हो पाए। 29वें मिनट में कृष्ण ने पूरा जोर लगाया लेकिन वह सफल नहीं हो पाए। इसके बाद प्रबंधक कमेटी ने कुश्ती बराबरी पर छुड़वा दी।
दूसरा पटका | नूरमहल में बग्गा कोहाली को मात्र 30 सैकंड में हराकर चर्च में आए सतिंदर चंडीगढ़ ने गढ़ा महा सिंह में पटके की दूसरी कुश्ती भी छह मिनट में जीत ली। उनके सामने थे - हिमाचल केसरी का खिताब पा चुके गौरव ऊना। हालांकि सतिंदर नूरमहल की तरह यहां भी शुरूआती सैकंड में ही गौरव को मिट्टी में ले आए थे। लेकिन गौरव किसी तरह बच गए। मैच के दूसरे, तीसरे, चौथे मिनट में सतिंदर ने बढ़त बनाई तो लोग उनकी जीत के लिए पक्के हो गए। छठे मिनट में ही रिजल्ट सामने था।
तीसरा पटका | मेहतपुर में बराबरी और रूपोवाल में हैरी मालकपुर को ढहाने वाले सतीश आलमगीर गढ़ा महा सिंह छिंज में पटके की तीसरी कुश्ती प्वाइंटों पर गन्नी लल्लियां से हार गए। कुश्ती की शुरूआत में ही गनी ही बढ़त बना ली थी। पहले छह मिनट तक तो गनी ने सतीश को जमीन से ही उठने नहीं दिया। फिर दोनों पहलवानों ने बराबर दांव पेच दिखाएं। जैसे-जैसे अंधेरा बढ़ा। कमेटी ने कुश्ती प्वाइंटों पर कर दी। इसमें गनी लल्लियां विजयी रहे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए मैट पर प्रेक्टिस जरूरी
हालांकि शरीर मिट्टी में ही तैयार होता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए पहलवानों को मैट पर खेलना पड़ेगा। मिट्टी जहां पहलवान को मजबूत बनाती है। वहीं, मैट पर पहलवान के दांव पेंच ही सामने उभर कर आते हैं। पहलवान मैट पर जरूर खेलें। जब तक वह मैट पर नहीं आएंगे, तब तक दंगल गांव स्तर तक ही रह जाएंगे। -अशोक कुमार गर्ग, अर्जुन अवॉर्डी,
(अशोक दिल्ली के कैप्टन चांदरूप अखाड़े से जुड़ रहे हैं)
अनुसाशन के लिए जानी गई छिंज | छिंज को लेकर जहां गांववासियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। वहीं, महिलाएं भी छतों पर चढ़कर पहलवानों के दांव पेंच देख रही थी। छिंज की बड़ी खासियत - यहां का अनुशासन रहा। पटके की तीनों कुश्तियों के दौरान कोई भी दर्शक पिड़ में नहीं आया। आम तौर पर ऐसा होता नहीं है। इसकी छिंज से लौट रहे खेल प्रेमियों में चर्च भी रही।
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