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डाउनलोड करेंजालंधर. 2008 में जालंधर व लुधियाना में करीब दो करोड़ के लैपटॉप चोरी करने वाला गिरोह शहर में दस्तक दे चुका है। पुलिस मान कर चल रही है कि करीब छह साल बाद झारखंड के साहिबगंज का यह गिरोह फिर से आया है। इसे गैंग के मेंबर आम चोर की तरह दिखाई नहीं देते। वे पब्लिक में अप-टू डेट दिखाई देते है। ट्रेन में सफर एसी कोच में करते हैं और सूट-बूट पहनते है, ताकि चोरी का माल बड़े-बड़े बैग में व्यापारी की तरह आसानी से ले जा सके। पुलिस कमिश्नर ईश्वर सिंह कहते है कि इम्पल इंफोसिस में जिस तरीके से चोरी हुई है, इसमें इसी तरह के गिरोह का हाथ लगता है। पुलिस गिरोह तक पहुंचने के लिए होटल और लॉज का रिकॉर्ड खंगाल रही है।
नवंबर 2008 में इसी कंपनी के मॉडल टाउन स्थित गोदाम से करीब 35 लाख के लैपटॉप चोरी हो गए थे। इससे पहले शास्त्री मार्केट चौक के पास स्थित एक शोरूम से भी लैपटॉप चोरी हुए थे। पुलिस ने जांच की तो लुधियाना में भी इसी तरीके से वारदातें होने का पता चला था। पुलिस ने माना था कि जालंधर और लुधियाना में करीब दो करोड़ के लैपटॉप चोरी हुई है। जालंधर पुलिस जांच करते हुए पहले वेस्ट बंगाल के मालदा और झारखंड के साहिब गंज में पहुंच गई थी। यहां से लीड मिली की हसन अली का गैंग तो लुधियाना में ही है।
पुलिस ने किसी तरीके गैंग के किंगपिन हसन अली और उसके तीन साथी खालिद शेख, अप्पू,और राजेश को पकड़ लिया था, लेकिन रिकवरी न के बराबर हुई थी। हसन ने माना था कि साहिब गंज एरिया में उन जैसे कई गिरोह सक्रिय है जो पंजाब में वारदात के लिए आते हैं। हसन ने माना था कि जालंधर में चोरी की घटना पहले से तय थी। इसलिए उसकी गैंग के कुछ साथी एसी कोच की बुकिंग करवा दी थी, ताकि बड़े आराम से लैपटॉप सुरक्षित भेजे जा सके। हसन ने माना था कि बांग्ला देश के सीमा के सटे कालिया चक्क में ही चोरी किए गए उपकरण बेचे जाते थे।
यहां से चोरी का माल बंगला देश चला जाता था। पंजाब से चोरी किए गए करीब दो करोड़ कर लैपटॉप उसकी गैंग ने ही सस्ते दाम में बेच दिए थे। हसन की गैंग बहुत बड़ी थी,लेकिन पुलिस उन्हें पकडऩे के लिए उनके ठिकाने पर गई,लेकिन खाली हाथ लौट आई थी। हसन और उसके साथी करीब दो साल तक जेल में रहे,लेकिन जमानत मिलने के बाद दोबारा पेशी पर नहीं आए। अदालत सभी को 2011 में भगोड़ा घोषित कर चुकी है।
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