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डाउनलोड करेंचंडीगढ़. पंचकूला के चर्चित ज्योति मर्डर केस में आरोपी हिमाचल के दून हलके से विधायक राम कुमार चौधरी की जमानत याचिका बुधवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। जस्टिस एमएमएस बेदी ने जमानत का लाभ दिए जाने की मांग को दरकिनार करते हुए कहा कि गवाह को धमकाने का मामला दर्ज होना गंभीर अपराध है। ऐसे में जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
चौधरी की तरफ से याचिका में कहा गया कि राम कुमार हिमाचल कांग्र्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक है। उनके पिता भी कई बार विधायक रहे और भाई बद्दी नगर परिषद के चेयरमैन व सोलन जिला परिषद के चेयरमैन हैं। ऐसे में राजनीतिक रंजिश के चलते उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया। पंचकूला पुलिस ने दबाव में मामले की जांच की और उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया। मामले की जांच पूरी हो चुकी है और ट्रायल कोर्ट में गवाहियां दर्ज की जा रही हैं। ट्रायल कोर्ट की लंबी प्रक्रिया के चलते उन्हें जमानत का लाभ दिया जाए।
मृतक ज्योति के पिता बूटी राम की तरफ से वकील एनएस शेखावत ने अदालत में कहा कि यह पहला मौका है जब राजनीतिक साजिश को आधार बनाकर जमानत की मांग की गई है। इससे पहले कहीं पर भी आरोपी ने इस बात का खुलासा नहीं किया। इसके अलावा गवाह के तौर पर बूटी राम को धमकाने के मामले में राम कुमार के खिलाफ होशियारपुर में केस दर्ज हो चुका है। ऐसे में यदि जमानत का लाभ दिया गया तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। बूटी राम की गवाही को दोबारा एग्जामिन करने के पंचकूला की अदालत में अर्जी विचाराधीन है।
चंडीगढ़ में बतौर पीजी रहने वाली होशियारपुर की ज्योति का शव 22 नवंबर की सुबह पंचकूला के सेक्टर 21 में मिला था। उसके चेहरे पर कार चढ़ाकर पहचान मिटाने की कोशिश भी की गई थी। ज्योति का बाकि सामान तो था लेकिन दोनों मोबाइल फोन नहीं मिले। ज्योति ने आखिरी बार अपने पिता बूटी राम को फोन किया था और कहा था कि वह रामकुमार चौधरी के साथ जा रही है। अगले दिन उसकी लाश मिली थी। ज्योति के पिता का कहना है कि ज्योति चौधरी के इलेक्शन में खर्च का लेन देन देख रही थी। हाल ही में बूटी राम ने पंचकूला की अदालत में इस मामले में राम कुमार चौधरी के पक्ष में बयान दिए थे और बाद मे कहा था कि डरा धमका कर दबाव में यह बयान दिए है।
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