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डाउनलोड करेंजालंधर. स्कूली किताबें भले ही अब भी यही पढ़ाती हों कि भारतीय आजादी की लड़ाई के सबसे तेजस्वी हीरो नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक विमान दुर्घटना में मारे गए थे। आधी सदी से ज्यादा तक देश यही मानता रहा कि 18 अगस्त 1945 को ताइपेई एयरपोर्ट पर वह विमान दुर्घटना में मारे गए। मगर नेताजी की मिस्ट्री सुलझाने के लिए 1999 में गठित जस्टिस मुखर्जी आयोग इसे खारिज कर चुका है। फिर नेताजी के साथ क्या हुआ? यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।
मगर लेखक अनुज धर अपनी नई किताब नो सीक्रेट्स में दावा करते हैं : अयोध्या के भगवनजी ही नेताजी थे। उन्हीं को गुमनामी बाबा कहा जाता था। वह 1986 तक जीवित थे। अगर उनके स्मोकिंग पाइप, टूथब्रश, रेजर वगैरा की डीएनए जांच करा ली जाए तो साबित हो जाएगा।
मुखर्जी आयोग की जांच को नई दिशा देने वाले पत्रकार-लेखक अनुज धर की मानें तो विमान दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु की घोषणा एक सोची समझी रणनीति थी। मुमकिन है, नेताजी की ही रणनीति। तर्क है - छह और नौ अगस्त 1945 को हिरोशिमा और नागासाकी में बम गिरे। पंद्रह अगस्त को जापान ने सरेंडर कर दिया। इसके बाद दो ही रास्ते थे। नेताजी भी सरेंडर कर दें। या गुम हो जाएं। इसलिए विमान दुर्घटना की थियरी गढ़ी गई। अचंभा यह है कि अंग्रेजों ने इस पर हमेशा शक किया। भारत सरकार ने मान लिया।
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