बठिंडा. सड़कों को फोर लेन, सिक्स लेन करने या शहरों के िवकास के लिए अब पेड़ काटे नहीं जाएंगे। बल्कि एक जगह से सही सलामत उखाड़कर दूसरी जगह प्लांट कर दिए जाएंगे। ये काम करेगी ट्री टांसप्लांटेशन मशीन। 2 करोड़ की ये मशीन पंजाब में फर्स्ट टाइम बठिंडा में आएगी। इसके लिए प्रशासन ने सरकार को एस्टीमेट भेज मंजूरी मांगी है। अभी ये मशीन गुजरात में है। वहां अच्छा काम कर रही है। बठिंडा के अफसर हाल ही में गुजरात गए थे। वहां इस मशीन का डैमो देखा था।
अभी विकास के नाम पर अंधाधुंध पेड़ काटे जा रहे हैं। जितने काटे जा रहे हैं। उस अनुपात में उतने लग नहीं पा रहे। जिससे पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। सड़कों को चौड़ा करने के लिए हजारों हरे पेड़ आए साल काटे जाते हैं। विकास के नाम पर पेड़ों को अब कटने से बचाया जा सकेगा। ट्री ट्रांसप्लांटेशन से हरे पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह पर रोपित किया जा सकेगा।
शहरीकरण के विकास की आपाधापी में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से हरियाली पर खतरा मंडराने लगा है। सड़कों को फोर लेन, सिक्स लेन के लिए चौड़ा करने के लिए हजारों हरे पेड़ आए साल काटे जाते हैं। सड़कों के विस्तार की आड़ में वन्य क्षेत्र का दायरा सिकुड़ता जा रहा है, पेड़ों की ताबड़तोड़ कटाई की तुलना में नए पौधे रोपित करने का अनुपात बेहद कम है और जो रोपित किए जा रहे हैं उन्हें पेड़ बनते तक हरियाली कई साल पिछड़ जाएगी।
मशीन ऐसे करेगी काम
1.ट्री ट्रांसप्लांटेशन मशीन ड्रिल मशीन की तरह काम करती है। पेड़ को उखाड़ने से पहले जहां उसे प्लांट करना है। वहां 100 सेंटीमीटर चौड़ा और 7 फुट गहरा गड्ढा खोदती है। फिर पेड़ को चारों ओर से कवर करती है। इसके बाद जमीन को पानी से नर्म कर जड़ों तक गड्ढा खोदकर पेड़ को बाहर निकाल लेती है।
2.पेड़ को मशीन के साथ लगे ट्रक पर लाद दिया जाता है। फिर खोदे गए गड्ढे में प्लांट कर मिट्टी से भर दिया जाता है। ट्रांसप्लांट किए पेड़ को दोनों ओर खंबे से बांधकर स्पोर्ट दी जाती है ताकि तेज हवा व आंधी से गिर न पाए। कुछ दिनों बाद पेड़ की जड़े नई जमीन में फैलनी शुरू हो जाती हैं। पेड़ हरा-भरा रहता है।
गुजरात में ये तकनीक यूज हो रही है। ट्री ट्रांसप्लांटेशन में करीब 85 फीसद हरे पेड़ चल जाते हैं। इस मशीन से रोड साइड के 600 पेड़ एक दिन में ट्रांसप्लांट किए जा सकते हैं। दो करोड़ की इस मशीन से बठिंडा के भी हजारों हरे पेड़ बचाए जा सकते हैं, एस्टीमेट बनाकर सरकार को भेजा गया है।
-संजीव तिवारी, डिविजनल फॉरेस्ट अफसर, बठिंडा
ड्रील की तरह काम करने वाली ट्री ट्रांसप्लांटेशन मशीन पानी से जमीन नर्म कर पेड़ को बाहर निकालती है। फिर साथ जुड़े ट्रक पर लादकर प्लांट करने वाली जगह पर ले जाती है।