जालंधर. कभी आठ डालर लेकर अमेरिका पहुंचे और वहां मिलियन डॉलर की बीजीएस ग्रुप नाम से आईटी कंपनी के मालिक बने। अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भी उनके घर आते थे। अमेरिका में अपनी अलग पहचान बनाने वाले भारतीय मूल के एग्रीकल्चर इंजीनियर 56 साल के जसिवंदर सिंह का बुधवार को जकार्ता में निधन हो गया। उन्हें कुछ समय से लीवर में इंफेक्शन की बीमारी थी। वह कैलिफोर्निया से इंडोेनेशिया में एक बिजनेस मीटिंग में गए थे। वहीं पर जकार्ता में उनकी तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। उनके शव को अभी जकार्ता में ही रखा गया है। अमेरिका में फॉर्मेलिटी पूरी होने के बाद परिवार को सौंपी जाएगी।
चाइल्ड हेल्प लाइन के सुरिन्द्र सैनी ने बताया कि एनआरआई जसविन्द्र सिंह उनके नजदीकी रिश्तेदार हैं। वह संत नगर लाडोवाली रोड जालंधर के रहने वाले है। उनका जन्म 24 अगस्त 1958 को डॉ. बलदेव सिंह के घर हुआ। उनकी 6 बहने डॉ. कौशल्य सैनी, राजिद्र कौर, कुलवंत कौर, प्रितपाल कौर, प्रवीन सैनी, मंजीत कौर तथा एक भाई सरविन्द्र सिंह है जसविन्द्र सिंह सातवें नंबर पर थे।
उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा दोआबा खालसा स्कूल से करने के बाद पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी लुधियाना से एग्रीकल्चर में इंजनरिग की। उसके बाद 1984 में उनकी शादी सुरिन्द्र कौर के साथ हुई उनके दो बेटे सन्नी सिंह व गौरी सिंह व एक बेटी शैली है। वह भारत से अमेरिका में 1986 आठ डालर जेब मे लेकर गए थे लेकिन अमेरिका में अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत बीजीएस ग्रुप नाम की कंपनी बना कर आईटी के क्षेत्र में अपना नाम बनाया है पंजाब के होशियारपुर जिले के पिंड साहबा में साढ़े 6 वाट का सोलर पावर प्लाट भी करोड़ों रुपये की इन्वेस्टमेंट कर लगाया।
इसके अलावा उनके हंसमुख स्वभाव के बलबूते पर पंजाब के मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल, उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल व कैबिनेट मंत्री विक्रमजीत सिंह मजीठिया के साथ गहरे पारिवारिक संबंध रहे है। इसके अलावा अमेरिका के वाइस प्रेसीडेंट एल गौर उनके निवास पर आ चुके है। उन्होंने वाइस प्रेसीडेंट गौर के चुनाव में प्रमोटर की भूमिका निभाई थी।