नवांशहर. इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) की ओर से हवाला मामले की जांच के लिए 5 सितंबर को पाल पाबला मनीचेंजर के घर से जब्त एक करोड़ 7 लाख 32 हजार 861 रुपए की पांच एफडीआर पाबला परिवार ने बैंक को गलत जानकारी देकर कैश करवा ली हैं। पांच सितंबर को शुक्रवार था और ईडी की कार्रवाई देर रात तक चलती रही। ईडी का आरोप है कि पाबला परिवार ने बैंकों में यह कहते हुए एफडीआर कैश करवा लीं कि ओरिजनल एफडीआर कहीं खो गई हैं या चुरा ली गई हैं। दस तारीख को जब ईडी की टीम पूरे कागजातों के साथ एफडीज के बारे में बैंकों को बताने पहुंची, तो पता चला कि यह दो दिन पहले ही कैश करवाई जा चुकी हैं।
बैकों से यह जानकारी मिलते ही ईडी के सहायक डायरेक्टर निरंजन सिंह ने पाल पाबला, उनकी पत्नी और पिता व अन्य के खिलाफ सिटी थाने में धोखाधड़ी, जाली कागजात तैयार करने तथा साजिश में शामिल होने की धाराओं के तहत मामला दर्ज करवाया है।
बैंकों को एफडी गुम होने की बात कहकर निकाले पैसे
ईडी के सहायक डायरेक्टर निरंजन सिंह ने बताया, पाल पाबला के दफ्तर व विकास नगर स्थित घर में छापेमारी के दौरान एक करोड़ 7 लाख की पांच एफडीआर भी पाल पाबली की पत्नी रंजीत कौर की हाजरी में दो गवाहों (विकास नगर की उषा रानी व पुरानी दानामंडी के ओम नाथ शर्मा) के सामने जब्त की थीं। पाल पाबला के घर से जब्त की गईं यह एफडीआर उनके खुद के, पत्नी रंजीत कौर, पिता प्यारा सिंह और फर्म के नाम पर थीं।
मामले की छानबीन के बाद 10 सितंबर को ईडी की टीम सहायक डायरेक्ट गुरविंदर कौर की अगुवाई में विभिन्न बैंकों जिनमें यह एफडीआर बनी थीं जैसे नौरा कोआप्रेटिव सोसायटी, आईसीआईसीआई बैंक नवांशहर, बैंक आफ बड़ौदा नवांशहर, आइसलैंड बैंक पहुंची, तो उन्हें पता चला कि यह एफडीआर तो 8 सितंबर को ही पाबला परिवार ने कैश करवा ली हैं। ईडी डायरेक्टर निरंजन सिंह ने शिकायत में पुुलिस को बताया कि पाबला परिवार को यह बात पता थी कि एफडीआर सर्च के दौरान जब्त की गई हैं, इसके बावजूद उन्होंने बैंकों में उनके गुम होने या खो जाने का शपत पत्र देकर धोखाधड़ी व जालसाजी की है। इस साजिश में उनके साथ और लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनसे इस तरह के कागजात तैयार करवाए गए हों, इसलिए मामले में धारा 120-बी भी जोड़ी गई है।
पाल पाबला मनी एक्सचेंज का नवांशहर मुख्यमार्ग पर स्थित दफ्तर।