पंजाबी के निराला थे लाल सिंह दिल

9 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

चंडीगढ़. मैं सदा ही लाल सिंह दिल की रचनाधर्मिता से प्रभावित था। मुझे वह अलग ही दुनिया का आदमी लगता था। सबसे पहले हिंदी पत्रिका 'पहल' के अंक 13 में इस कवि की लेखन क्षमता का परिचय पाया तो वह मन में घर कर गया। इसके बाद जालंधर में एक सम्मान-समारोह के दौरान लाल सिंह को सुनने का मौका मिला। बहुत ही 'निमाणा' कवि था। शालीन, सहमा और फरेब भरे जज्बात से दूर।

हर किसी के दिल में अपने शब्दों की गूंज को पहुंचाने की क्षमता रखने वाला कवि जैसा नजर आया था वह। इसके बाद चंडीगढ़ में जब फिर से उसके काव्य पाठ को सुना तो बस मन को भा गया और तय कर लिया कि इस ऊंचे पाये के अनोखे पंजाबी कवि की रचनाओं को हिंदी के पाठकों तक पहुंचाना है। इसके लिए एक ही माध्यम था अनुवाद। उसके जरिए ही उनकी रचनाओं को हिंदी के विशाल पाठक-समुदाय तक पहुंचाया जा सकता था। इसी सोच के चलते मैंने लाल सिंह दिल की प्रतिनिधि कविताओं का अनुवाद अपनी पुस्तक 'लाल सिंह दिल प्रतिनिधि कविताएं' में समाहित किया है।

यह बातें हाल में छपी इस पुस्तक के अनुवादक एवं पीयू के हिंदी विभाग में टीचर डॉ. सत्यपाल सहगल ने साझी कीं।
डॉ. सहगल ने बताया कि लाल सिंह दिल की रचनाओं का अनुवाद करना इतना आसान नहीं था क्योंकि यह ऐसा कवि था जो उन लोगों के बारे में कविता लिखता था जो समाज में दीन, हीन और सबसे उपेक्षित रहे हैं। इसके साथ उसकी रचनाओं की ग्रामीण पृष्ठभूमि, राजनीति तथा सिख इतिहास के संदर्भ भी अलग चुनौती पेश करते थे।

दिल की रचनाओं का अनुवाद करने से पहले उनको उनके परिवेश में समझने के लिए उनके निवास स्थान समराला में उनके घर में जाना मुनासिब समझा और मैं अपने और दिल के मित्र तथा प्रसिद्ध पंजाबी साहित्यकार-आलोचक डॉ. सुखदेव सिंह के साथ उनके घर जा पहुंचा। वहां जाकर मैंने हकीकत का जो आईना देखा उससे स्पष्ट हो गया कि दिल घोर मुफलिसी में जीवन व्यतीत करके भी रास्ता कभी नहीं बदलने वाला शख्स है। और था भी यही। दिल ने कविता के सुर को न कभी मद्धम किया और न कभी बदला।

बकौल डॉ. सहगल-'जिस तरह हिंदी में निराला ने अपनी रचनाधर्मिता के साथ कभी समझौता नहीं किया उसी तरह लाल सिंह दिल ने भी कविता के विद्रोह-भरे रास्ते के साथ कोई आँय-बाँय नहीं की।Ó डॉ. सहगल ने बताया कि दिल पंजाब की पृष्ठभूमि से जुड़ा ऐसा दलित-सिख था जिसने भूमिहीन किसानों के बिम्ब लेकर उन्हें रचनाओं में भरपूर जगह दी। वह केवल गरीबी और जात के सवालों से जूझती मानवता को ही मुंहफट ढंग से पेश नहीं करता, बल्कि उसने कलात्मक दृष्टि से भी उच्चकोटि की रचनाएं लिखी हैं जो मन को गहरे छू जाने वाली हैं।