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कोर्ट का फैसला: रेपिस्ट का साथ देने पर 20 साल कैद की सजा

7 वर्ष पहले
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(सांकेतिक फोटो)
जालंधर. एडिशनल सेशन जज हरवीन भारद्वाज की कोर्ट ने नाबालिग रेपिस्ट को शह देने और साजिश के दोषी 23 वर्षीय मनप्रीत उर्फ मनी को बीस साल की कैद और 22 हजार रुपए का जुर्माना की सजा सुनाई है। मनी होशियारपुर के कस्बा शाम चौरासी का रहने वाला है। रेपिस्ट और उसके सहयोगी का जुवेनाइल कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। कोर्ट ने मनी को आईपीसी की धारा 376 डी (गैंग रेप) और 120-बी 20-20 साल और 506 (जान से मारने की धमकी देना) में 7 साल की कैद की सजा सुनाई है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। कोर्ट की ओर से सुनाया गया यह फैसला एंटी रेप लॉ बनने के बाद जालंधर में पहला फैसला है।

पुलिस के रिकार्ड के अनुसार थाना आदमपुर में बीते साल 27 फरवरी को 21 साल की पीड़िता ने स्टेटमेंट दी कि वह डेढ़ महीने से अलावलपुर में रहते मामा के घर आई थी। 26 फरवरी की शाम वह मामा के घर के बाहर थी। इस दौरान उसका परिचित सोनू (बदला हुआ नाम) अपने दोस्त और मनी के साथ आए। सोनू बोला तुम्हारी मम्मी की तबीयत खराब है और उसे बुलाया है। वह सोनू की बात मान कर उसकी बाइक पर बैठ कर आ गई। पीछे मनी अपने दोस्त के साथ आ रहा था। रास्ते में एक खेत में बने कमरे में सोनू उसे ले गया। यहां पर उसकी मर्जी के खिलाफ रेप किया। मनी और उसका दोस्त कमरे के बाहर खड़े रहे। उसे रास्ते में सोनू और उसके दोनों दोस्तों ने धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो उसके भाई को जान से मार देंगे। सोनू उसे कस्बा शाम चौरासी ले गया।
वहां पर एक घर में सारी रात फिर रेप किया। पुलिस ने दोनों आरोपी पकड़ लिए। पहले दोनों को बालिग आरोपी मान रही थी, लेकिन उनकी फैमिली सबूत लेकर आई कि दोनों आरोपी 18 साल के नहीं हुए, होने वाले हैं। इस बीच बीते साल 15 अप्रैल को मनी ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया।
रेपिस्ट को शह देना गैंग रेप ही है: सरकारी वकील
अभियोजन पक्ष के सरकारी वकील हरनेक सिंह (डिप्टी डीए) ने बचाव पक्ष के इस तर्क को दलील देते हुए खारिज किया कि मनी ने कोई रेप नहीं किया। सरकारी वकील ने कोर्ट को कहा कि पीड़िता को उसके मामा के घर से एक साजिश के तहत दोषी लेकर आए। इस साजिश में मनी भी था। वहीं जब पीड़िता के साथ रेप किया जा रहा था तो मनी अपने एक दोस्त के साथ खड़े होकर शह देता रहा। पीड़िता को धमकी दी गई। सरकारी वकील बोले चाहे रेप एक ने किया है, लेकिन रेप की साजिश में लिप्त होना और शह देना गैंग रेप ही है। इसलिए रेप रोकने के लिए बनाए गए कानून के तहत मनी को वही सजा मिलनी चाहिए जो रेप के दोषी को मिलती है, ताकि दोबारा कोई मुजरिम ऐसा करने से पहले जरूर सोचे। पीड़िता का अपनी स्टेटमेंट पर स्टैंड रहा।
वर्मा कमीशन के बनाए गए कानून के तहत सख्त सजा
दिल्ली में चलती बस में हुए रेपकांड को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस जेएस वर्मा की सुपरविजन में कमीशन का गठन किया था। वर्मा कमीशन को रेप कानून में बदलाव को लेकर सिफारिश देने को कहा था। वर्मा कमीशन की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने नया एंटी रेप लॉ बनाया था। इसके लिए आईपीसी और सीआरपीसी में तमाम बदलाव किए गए। इसके तहत सख्त कानून बनाए गए। कई नए कानूनी प्रावधान किए गए। इसमें ही आईपीसी की धारा 376-डी का प्रावधान किया गया है। इसके तहत कम से कम 20 साल और ज्यादा से ज्यादा उम्रकैद (मरते दम तक) की सजा का प्रावधान किया गया है। अगर इस दौरान पीड़ित कोमा में चली जाए या उसकी मौत हो जाए तो अधिकतम फांसी की सजा होगी।
कोर्ट ने चार्ज गैंग रेप में लगाया था
थाना आदमपुर की पुलिस ने केस की जांच पूरी कर चालान कोर्ट में पेश कर दिया। कोर्ट में दो आरोपियों के नाबालिग होने के सबूत पेश किए गए। यहां से दो आरोपियों के ट्रायल के लिए मामला जुवेनाइल कोर्ट में भेज दिया गया, जबकि मनी पर उक्त कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ। पुलिस ने इस केस को रेप की घटना मानते हुए केस में साजिश और जान से मारने की धारा जोड़ी थी, लेकिन कोर्ट ने 7 नवंबर, 2013 को मनी पर 376 डी, 120-बी और 506 चार्ज लगाया।