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  • The Education Minister Of Punjab Gave A Positive Declaration For Private Schools

निजी स्कूलों के लिए मंत्री का फील गुड बयान

9 वर्ष पहले
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जालंधर. 'अगर सरकारी स्कूल आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को दाखिला नहीं देता है तो उसे प्राइवेट स्कूल में दाखिल करवाया जाएगा। उसका खर्च राज्य सरकार उठाएगी। शिक्षा का अधिकार कानून के प्रावधानों के विपरीत राज्य के शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका ने यह बयान मंगलवार को दिया।

कन्या महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे मंत्री के इस बयान को लोग निजी स्कूलों के लिए राहत के रूप में देख रहे हैं। आरटीई में प्रावधान है कि सरकारी स्कूल किसी विद्यार्थी को दाखिला देने से मना नहीं कर सकते। ऐसा किया तो डीईओ कार्रवाई कर सकते हैं। सरकारी स्कूल मना ही नहीं करेंगे तो क्या निजी स्कूलों में आरटीई लागू नहीं होगा?

31 मार्च है अंतिम तिथि : राइट टू एजूकेशन को हर हाल में 31 मार्च तक पूरी तरह लागू करना है। मंत्री का कहना है कि निर्धारित समय में एक्ट सरकारी स्कूलों में लागू कर दिया जाएगा। हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने पर भी जोर दिया जाएगा।

प्राइवेट स्कूलों के लिए कानून बनेगा: मलूका ने कहा कि प्राइवेट स्कूल राज्य सरकार के शिक्षा विभाग की नहीं सुन रहे। उन पर शिकंजा कसने के लिए कानून बनाने की तैयारी की जा रही है।

क्या कहता है आरटीई
सुप्रीम कोर्ट ने राइट टू एजूकेशन एक्ट 2009 (आईटीई) के तहत हर निजी स्कूल को आर्थिक रूप से कमजोर 25 फीसदी बच्चों को दाखिला देने को कहा है। स्कूल की कुल सीटों में से 25 फीसदी सीटें आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए होंगी। इन बच्चों को पहली क्लास से लेकर 14 वर्ष की आयु तक मुफ्त शिक्षा मुहैया करवाने का जिम्मा भी स्कूल का ही होगा।

जटिल हो जाएगी स्थिति
पंजाब-चंडीगढ़ कॉलेज टीचर यूनियन के एरिया सेक्रेटरी तेजिंदर विरली का कहना है कि फ्री-एजुकेशन किसी भी प्राइवेट शैक्षिक संस्थान में नहीं दी जा रही। अगर दिया जा रहा है तो सिर्फ धोखा। शिक्षा मंत्री का यह बयान कि सरकारी स्कूल मना करेंगे तो प्राइवेट स्कूल में दाखिल मिलेगा से स्थिति और जटिल हो जाएगी।