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28 साल पहले करतार ने दिलाया था देश को एशियाड में पहला गोल्ड

7 वर्ष पहले
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जालंधर। 28 साल बाद देश को रेस्लिंग में एशियाड में दूसरा गोल्ड मेडल मिला। पहले गोल्ड 1986 में सियोल में हुई खेलों में जालंधर के ही पहलवान करतार सिंह ने 100 किग्रा. भार वर्ग में जीता था। अब हरियाणा के योगेश्वर दत्त ने इंचियोन में गोल्ड जीता। योगेश्वर ने 65 किग्रा. भार वर्ग में यह मेडल जीता।
योगश्वर की जीत पर अर्जुन अवार्डी करतार सिंह को जितनी खुशी हुई है, उससे अधिक दर्द भी है। खुशी इस बात की है कि देश को कुश्ती में उनके बाद किसी पहलवान ने एशियाड में गोल्ड जीता है। दुख इस बात का कि उनके बाद पंजाब में कोई पहलवान तैयार नहीं हो सका, जो उनके ही रिकार्ड तोड़ता। करतार सिंह कहते हैं कि उस समय देश को केवल पांच मेडल मिले थे। इनमें चार लड़कियों के थे और एक करतार सिंह का।
तब के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दिल्ली में हुए सम्मान समारोह में सोनिया गांधी से कहा था - आओ आपको ऐसे पहलवान से मिलाता हूं, जिन्होंने मेडल जीतकर देश के मर्दों की लाज रखी है। वह कहते हैं - पहलवानी करना कोई कबड्डी खेलने जैसा नहीं है। इसमें जूनुन होना चाहिए। बिना जूनून के कोई मेडल नहीं आता है। हमारे समय में कोई सुविधाएं नहीं थी। दिल्ली के छोटे से अखाड़े में प्रैक्टिस करते थे। लेकिन टारगेट एक ही होता था कि मेडल हासिल करना। अब तो गेम चुनने से पहले खिलाड़ी उससे क्या हासिल होगा इसके बारे में सोचते हैं। क्यूबा और नाइजीरिया जैसे देश में गरीबी है, लेकिन वहां के खिलाड़ी देश के लिए खेलते हैं। वह कहते हैं कि हम पेट के लिए लड़ते हैं, जबकि चाइना और क्यूबा जैसे देश देश के लिए लड़ते हैं।
कुश्ती में सिस्टम नहीं
पंजाब में कुश्ती के गिरते स्तर पर उनका कहना है कि कोई सिस्टम नहीं और कोई पूछने वाला नहीं है। खेल ऐसा बिजनेस है जहां शोहरत के साथ ही साथ भरपूर पैसा है। पंजाब में मैंने बहुत नेशनल लेवल के प्लेयर तैयार किए, लेकिन यहां के लोग खेल को बाहर जाने के रास्ते के रूप में प्रयोग करते हैं। इस वजह से कुश्ती समेत दूसरे गेम का स्तर गिर रहा है। वह कहते हैं कि यदि मेरे हिसाब से पंजाब में कुश्ती के लिए काम किया जाए तो चार साल के भीतर ही ओलिंपिक में गोल्ड मेडल आ जाएगा। हमारे पास खिलाड़ी हैं बस उन्हें तैयार करने की जरूरत है।
करतार की नजर में योगेश्वर
योगेश्वर दत्त एक जुनूनी खिलाड़ी हैं। वह खेलते समय केवल मेडल के लिए लड़ता है। इसके नीचे वह नहीं सोचता है। हार के बाद योगेश्वर अपने गेम को कई बार देखता है। हार के कारणों की तलाश करता है। इसके बाद अपने गुरु के साथ मिलकर उस कमी को दूर करता है। ओलिंपिक के दौरान जब मेडल नहीं आया था तो वह बहुत परेशान हुआ था। वह रिंग में उतरने से पहले भी विरोधी की गेम को पूरा देखता है। उसकी कमियों को देखकर उस पर अटैक करने की योजना बनता है। हरियाणा की तरफ से खिलाड़ियों की पूरी सुविधाएं दी जा रही है।