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टोकें नहीं, बच्चों को अपने तरीके और सोच से लिखने दें

8 वर्ष पहले
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जालंधर. सीबीएसई स्कूलों में 70 फीसदी असेसमेंट स्कूल बेस्ड है और 30 फीसदी बोर्ड द्वारा ली गईं परीक्षाओं पर आधारित। सीसीई को लागू करने की ओर पहला कदम उठाया जा चुका है। सवाल बदलने, उन्हें ज्यादा उपयोगी और टू द प्वाइंट बनाने की जरूरत है। बच्चों के जवाब से पहले अपने सवालों को करेक्ट करें। भारत में बड़े बदलाव युवा कर रहे हैं, क्या हम अपने स्कूल में युवाओं से पूछते हैं कि वह क्या सोचते हैं, क्या चाहते हैं। उन्हें पूछना होगा, वो आपको उनकी एनर्जी, नॉलेज के हिसाब से सवाल बदलने और नए सवाल बनाने में मदद मिलेगी।

मल्टीपल सवाल बनाते हुए टीचर्स जो विकल्प देते हैं, कई बार वह भी ठीक नहीं होते। जैसे किसी सवाल के जवाब में विकल्प हैं, 25 फीसदी, 50 फीसदी तो यह गलत है। 25 फीसदी यानी हम बच्चे को 15 फीसदी का ऑप्शन भी 25 फीसदी में दे रहे हैं। विकल्प स्पेसिफिक होने चाहिए। फिर जवाबों की ओर आएं। अगर शॉर्ट आंसर वाले सवाल हैं, तो जवाब दो लाइन में नहीं। एक या दो शब्द में होना चाहिए। ये फोकस बनाएगा।

बच्चों को उनके तरीके और सोच से लिखने दें : सहोदय सीबीएसई स्कूल जालंधर कॉम्पलेक्स के सहयोग से सेंटर फॉर इवेल्यूएशन एंड रिसर्च द्वारा प्रिंसिपल मीट के आखिरी दिन असेसमेंट के लिए अगर हम निबंध लेखन करवा रहे हैं, तो हमें उन्हें बांधना नहीं है कि ऐसे लिखो या इतने शब्दों में लिखो। उन्हीं अपने तरीके से अपनी सोच के अनुसार लिखने दीजिए। अगर कोई निबंध बदलते राजनीतिक परिदृश्य पर लिख रहा है तो उनसे पहले चर्चा करें। वह चाहें तो तस्वीरें और पेटिंग भी इसके साथ जोड़ सकते हैं।