जालंधर । तेईस साल तक अदालत में लड़ाई लड़ने के बाद दुकानदारों की अंतिम लड़ाई सड़क पर हुई। दोपहर तीन बजे जैसे ही कोर्ट का बैलिफ पुलिस के अमले के साथ कोर्ट नोटिस लेकर पहुंचा, दुकानदारों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया। भनक तो पहले से थी, कि कार्रवाई होनी है।
सो सामान पहले से ही बंधा बंधाया था। दुकानों के ऊपर बने कमरे में रहने वाला राममूर्ति का परिवार रुआंसा सा अपना सामान बांधकर बाहर निकाल रहा था। शाम को छह बजते-बजते दुकानें और कमरा खाली हो चुका था। पुलिस दुकानों पर ताले लगवाकर कार्रवाई मुकम्मल करने ही वाली थी कि पुलिस दुकानदारों का विरोध शुरू हो गया।
वे इस बात पर अड़ गए कि कोर्ट ने दुकानों पर ताले लगाने का आदेश नहीं दिया। अगर वक्फ बोर्ड को दुकानें गिरानी हैं, तो वे जेसीबी मशीन मंगवाएं और कार्रवाई कर डालें। बहस के बीच पुलिस ने मशीन मंगवा भी ली, लेकिन उसे चलाने को लेकर संशय बना रहा।
बोर्ड ने कहा- दुकानें ऐसे नहीं तोड़ सकते। नक्शे के अनुसार दुकानों के पीछे दीवार थी। पहले उसे बनाया जाए। उसके बाद आगे की इमारत तोड़ी जाए। बस इसी बात पर बवाल चलता रहा। एसीपी संधू, कोर्ट के बैलिफ और वक्फ बोर्ड के सदस्य मारवाड़ी नमकीन शॉप के अंदर जा पहुंचे। शटर गिरवा दिया। बैलिफ ने कहा- दुकानें खाली हो चुकी हैं। आप कब्जा मिल जाने की बात लिखकर दे दें।
पर बोर्ड सदस्य ने कहा- जब तक पीछे की दीवार उठाकर कब्जा सही तरीके से नहीं दिलाया जाता, वह लिखकर नहीं देंगे। करीब दो घंटे तक विवाद के बाद अंत में दुकानों पर ताला लगाने का फैसला हुआ। तब दुकानदारों और पुलिस के बीच बहस शुरू हो गई। अंत में करीब ग्यारह बजे ताले जड़ दिए गए। एडवोकेट मोहम्मद ने बैलिफ को यह लिखकर दे दिया कि दुकानों में ताले लग गए हैं।
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