(गुरभेज की बेटी को दिलासा देते परिजन)
जालंधर. व्हाइट डायमंड रिजोर्ट के दोनों पार्टनर गुरभेज सिंह और अजमेर सिंह की दोस्ती के चर्चे पूरे मिट्ठापुर में हैं। पहले दोनों ने एक साथ प्राॅपर्टी का कारोबार शुरू किया। कालोनियां भी काटी। पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह केपी के दोनों करीबी थे। उन्हें कांग्रेसी में ओहदे भी मिले थे। लोग बताते हैं कि सुबह से लेकर रात गुरभेज व अजमेर इकट्ठे होते थे, लेकिन किसी ने ये नहीं सोचा था कि जिंदगी से भी एक साथ रुख्सत होंगे। दोनों का अंतिम संस्कार भी साथ-साथ ही हुआ।
मेरे पापा नू कुछ नहीं होया, ऐहना नू ना लै के जाओ...
गुरभेज की बेटी की रोने की आवाज श्मशानघाट में गूंज रही थी। उसे देखकर सभी की आंखें नम थीं। जब उनके शव को जलाने के लिए ले जाने लगे तो वह बोली-मेरे पापा नू कुछ नहीं होया, ऐहना नू ना लै के जाओ। जब उन्हें लकड़ियों पर लिटाया गया तो वह लाश के पास ही बैठ गई। बोली-मुझे मेरे पापा के पास बैठे रहने दो।
केपी, परगट, समरा ने जताया शोक
दुख की घड़ी में दोनों के परिवारों को ढांढस बंधाने के लिए अंतिम संस्कार के समय विधायक परगट सिंह, पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह केपी, पूर्व विधायक जगबीर सिंह बराड़, पूर्व मंत्री अमरजीत सिंह समरा, पार्षद बलराज ठाकुर, पूर्व पार्षद कुलदीप ओबराय, मनोज अरोड़ा, मनजिंदर सिंह जौहल, पीपीपी नेता जसविंदर बिल्ला, एसपी गगनअजीत सिंह समेत मिट्ठापुर के सैकड़ों लोग मौजूद थे।
ढाबे पर खाना खाने के बाद अमृतपाल ने अजमेर से गाड़ी ली
अमृतपाल चट्ठा घबराहट के कारण बात नहीं कर पा रहे थे। हादसे के चश्मदीद परमजीत सिंह टीनू ने बताया कि डॉग लेकर जालंधर आ रहे थे। फिरोजपुर में उन्होंने एक ढाबे पर खाना भी खाया। तब पहले गाड़ी अजमेर सिंह चला रहे थे। खाना खाने के बाद अमृतपाल ने गाड़ी उससे ले ली। वह वापसी पर थे। उन्हें पता ही नहीं चला कि क्या हो गया। गाड़ी अचानक नीचे उतरकर पेड़ से जा टकराई। वह गाड़ी से उछलकर बाहर की तरफ गिरे।
काफी देर तक उनका दिमाग सुन्न हो गया। काफी देर तक उन्हें कोई उठाने भी नहीं आया। अंधेरा होने के कारण पता नहीं चल रहा था। फिर एक गाड़ी वाले ने उन्हें देखा और पुलिस को सूचना दी। ये भी चर्चा थी कि खाना खाने के कारण अमृतपाल को नींद आ गई होगी। श्मशानघाट में लोग बातें कर रहे थे कि अक्सर गुरभेज व अजमेर शहर से बाहर अपनी फॉरच्यूनर पर जाते थे, मगर मंगलवार को पता नहीं कैसे बोलेरो पर चले गए।