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गलाडा का इंडस्ट्रियल पार्क ड्राॅप, किसानों की 1599 एकड़ जमीन फंसी

7 वर्ष पहले
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लुधियाना। लुधियाना-चंडीगढ़ हाइवे और लुधियाना-दिल्ली हाइवे के बीच 1599 एकड़ जमीन में बनने वाले इंडस्ट्रियल पार्क को सरकार ने ड्राॅप कर दिया है। इससे न तो साहनेवाल एयरपोर्ट का विस्तार हो सकेगा और न ही इंडस्ट्रियलिस्ट्स को इंडस्ट्रियल फोकल प्वाइंट मिल सकेगा। ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गलाडा) के इस प्रोजेक्ट को ड्राॅप करने के पीछे फंड का अभाव बताया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 3500 करोड़ रुपए खर्च होने थे।
प्रोजेक्ट ड्राॅप होने से नौ गांवों के किसानों की जमीन फंस गई है। किसान न तो अपनी जमीन बेच सकते हैं और न ही उस पर कोई लोन ले सकते हैं। क्योंकि गलाडा ने सेक्शन-4 का नोटिस जारी कर इसे प्रोजेक्ट के लिए आरक्षित कर रखा है। गलाडा ने नौ गांवों की 2106.676 एकड़ एक्वायर करने के लिए नोटिस निकाला। लेकिन बाद में 517.676 एकड़ जमीन प्रोजेक्ट से बाहर निकाल दिया गया था। इस प्रोजेक्ट के लिए अब 1599 एकड़ जमीन ही गलाडा के पास थी। गलाडा के एसीए कुलदीप सिंह वैद्य कहते हैं कि डि-नोटिफाई में वक्त लगेगा। तब तक रेवेन्यू रिकार्ड में में ये जमीन गलाडा के प्रोजेक्ट के नाम पर ही दर्ज रहेगी।
ये बनना था पार्क में
प्रोजेक्ट में फाइव स्टार होटल, मॉल, मल्टीप्लेक्स, अस्पताल, स्टेडियम और स्कूल प्रस्तावित थे। इंडस्ट्रियल शहर होने के कारण इस मेगा प्रोजेक्ट में इंडस्ट्रियल जोन भी रखा गया है। इस प्रोजेक्ट में धारोड़, नत, पावा पिंड, ब्राह्मण माजरा, संघोवाल, लोहारा, जसपाल बांगर, गरीब नगरी, हरनाम पुरा की जमीन शामिल की गई। प्रोजेक्ट में इंडस्ट्रियल एरिया के लिए 60 फीसदी, रिहाइशी एरिया - 30 फीसदी और कामर्शियल एरिया के लिए 10 फीसदी जमीन रिजर्व थी।
सेक्शन -4, 5 के मायने
इस प्रोजेक्ट के लिए गलाडा ने 2013 में सेक्शन-4 के तहत नोटिस निकाला था। इसमें उन किसानों से आपत्तियां मांगी थी, जिनकी जमीन एक्वायर की जानी थी। आपत्तियों के बाद गलाडा ने सेक्शन-5 जारी कर दिया। सेक्शन -5 की धाराओं में किसानों की आपत्तियों की सुनवाई और उन्हें सेटलमेंट किया गया।
एयरपोर्ट को 300 एकड़
प्रोजेक्ट में 1500 एकड़ जमीन को एक्वायर कर करीब 300 एकड़ जमीन सिविल एविएशन डिपार्टमेंट को सौंपना था। इस जमीन में साहनेवाल एयरपोर्ट को विस्तार किया जाना था। इससे एयरपोर्ट के आस-पास के गांव की जमीन को शामिल किया गया था।
प्रोजेक्ट कंपलीट होता तो ये मिलती सुविधाएं
अगर ये प्रोजेक्ट कंपलीट हो जाता तो एयरपोर्ट का विस्तार हो जाता। इससे हर बड़े शहर के लिए साहनेवाल से सीधी फ्लाइट मिल सकती। इससे खास कर इंडस्ट्रियलिस्ट व कारोबारियों को बड़ा फायदा मिलता। अभी कारोबारियों को देश के दूसरे बड़े शहरों में जाने के लिए चंडीगढ़ एयरपोर्ट जाना पड़ता है। वहीं अर्बन इस्टेट के विकसित होने से शहर को एक नया इलाका मिलता।
^सरकार के आदेश पर इंडस्ट्रियल पार्क का खाका तैयार किया गया था। अब सरकार ने इसे ड्राप कर दिया है। जिससे अब इस प्रोजेक्ट पर गलाडा ने काम बंद कर दिया। किसानों की जमीन वापस करने के लिए डि-नोटिफाई किया जाएगा, इसमें वक्त लगेगा।
- कुलदीप सिंह वैद्य, एसीए, गलाडा।