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लुधियाना की होलेस्टीन फ्रेजन गाय देती है 58.3 लीटर दूध

7 वर्ष पहले
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लुधियाना। डेयरी एंड एग्रो एक्सपो-2014 में आयोजित मिल्किंग कंपीटिशन में लुधियाना के सरदारपुरा स्थित सतलुज डेयरी की पंजाब होलेस्टीन-फ्रेजन नस्ल की गाय ने 58.3 किलो दूध देकर रिकॉर्ड बनाया है। जबकि मोगा के नूरपुर गांव से आए हरप्रीत सिंह की गाय 55.80 किलो के साथ दूसरे और अमृतसर के गांव नाग खुर्द के रवि इंदर सिंह की गाय 53.98 किलो दूध के साथ तीसरे स्थान पर रही। जगराओं में आयोजित एक्सपो में फार्मर्स, ब्रीडर्स ने मिल्किंग और ब्रीडिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।
प्रतियोगिता में होलेस्टेन-फ्रेजन, जर्सी, नीली रावी बफैलो और मुर्राह समेत कई ब्रीड्स के 850 एनीमल्स शामिल थे। ये कंपीटिशन अलग-अलग कैटेगरी में आयोजित किए गए।
इस मौके पर पशुपालन, मछली पालन और डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड मंत्री गुलजार सिंह रणीके, एमएलए मनप्रीत सिंह अयाली, एमएलए एसआर कलेर, डेयरी बोर्ड के डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह और डायरेक्टर एनीमल हसबेंडरी एचएस संधा मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने पीडीएफए को एक सफल शो के लिए बधाई दी और पंजाब में डेयरी उद्योग की संभावनाओं का जिक्र भी किया। मौके पर प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया।
जर्सी नस्ल में भी लुधियाना का दबदबा
जर्सी नस्ल की गायों की मिल्किंग प्रतियोगिता में भी लुधियाना विजेता रहा। इसमें भी सरदारपुरा के सतलुज डेयरी की गाय ने 44.38 लीटर दूध के साथ रिकॉर्ड बनाया। रोपड़ के खेरपुर से आए परमिंदर सिंह की गाय 25.88 लीटर के साथ दूसरे स्थान पर रही। जबकि भैंसों की मिल्किंग प्रतियोगिता में फतेहगढ़ साहिब के गांव रुड़की के किसान बलविंदर सिंह की भैंस 21.80 लीटर के साथ पहले बठिंडा के गांव रोलेके के चमकौर सिंह की भैंस 20.14 लीटर के साथ पर रही। सांडों के नस्ल में भी लुधियाना के गांव कोटाला के मनिंदर सिंह का सांड विजेता बना।
क्या है होलेस्टेन- फ्रेजन नस्ल की खासियत:
^होलेस्टेन-फ्रेजन मूलत: इंग्लैंड, स्विटजरलैंड और यूएसए में पाई जाने वाली नस्ल है। ठंडे प्रदेशों की इस नस्ल के लिए इंडिया में सर्वाइव करना मुश्किल होता है। काफी साल पहले ही इंडियन ब्रीड साहीवाल से इसकी क्रॉस ब्रीड तैयार की गई थी। जेनरेशन वाइज यह इंडिया में सर्वाइव कर सकी। होलेस्टेन-फ्रेजन नस्ल की गाय ज्यादा से ज्यादा दूध देने में सक्षम है। बशर्ते की इसकी सही तरीके से देखभाल की जाए। ज्यादा दूध उत्पादन करने वाले डेयरी किसानों के लिए यह सबसे अच्छी नस्ल है।
जेएस भट्टी, हेड डिपार्टमेंट ऑफ वेटरनरी एंड एनीमल हसबेंडरी
(फोटो- एक्सपो में फार्मर्स, ब्रीडर्स ने मिल्किंग और ब्रीडिंग कपीटिशन में हिस्सा लिया।)