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शहीदों के केस की दोबारा सुनवाई उनका अपमान : मजलिसे अहरार

5 वर्ष पहले
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{लाहौर हाईकोर्ट में शहीदे आजम भगत सिंह और उनके साथियों का केस री-आेपन होने का मामला

लुधियाना|शहीदे-आजमभगतसिंह, उनके साथियों राजगुरु और सुखदेव के मुकदमे की दोबारा सुनवाई किए जाने पर मुल्क की जंगे आजादी में अहम रोल निभाने वाली पार्टी मजलिसे अहरार इसलाम हिंद ने कड़ा एेतराज जताया है। पार्टी का मानना है कि लाहौर हाईकोर्ट में इस केस को री-आेपन कराने के पीछे गहरी साजिश है। इसी बहाने गुलाम हिंदुस्तान की जनता पर जुल्म करने वाली बरतानवी सरकार को क्लीन चिट देना है, जिसका पार्टी हर स्तर पर विरोध करेगी। शनिवार को यहां फील्डगंज स्थित शाही जामा मस्जिद में मौलाना हबीब उर रहमान सानी ने प्रेस काॅन्फ्रेंस के दौरान यह बात कही। काबिलेजिक्र है कि पार्टी के कौमी सदर मौलाना हबीब के परदादा जंगे आजादी के दौरान मजलिसे अहरार के चौथे सदर थे।

इत्तेफाक से लाहौर मुकदमे को लेकर यह एेतराज उसी पंजाब सूबे से आया है, जो शहद भगत सिंह और सुखदेव थापर की जन्मस्थली है। मौलाना हबीब ने जज्बाती होकर बोले कि शहीद सुखदेव थापर इसी शहर में जन्मे, हमें इसका भी फख्र है।

लाहौर हाईकोर्ट के वकील इम्तियाज रशीद ने आजादी के 70 साल बाद इस मामले को दोबारा उठाकर शहीदों की शान में गुस्ताखी की है। यह एक साजिश है, ताकि अंग्रेजी हुकूमत के दामन पर लगे उनके जुल्मों के धब्बों मिटाए जा सकें। शहादत पर सियासत का यह गंदा खेल नहीं चलने दिया जाएगा। शहीद का दर्जा कोई अदालत या सरकार नहीं दिया करती, शहादत देने वालों के कद्रदान यह इज्जत बख्शते हैं। मजलिसे अहरार पार्टी फिरंगियों और उनके हमदर्दों से नफरत करती थी और करती रहेगी।

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