हम सिफारिश कर सकते हैं कार्रवाई नहीं
गोलमाल है सब गोलमाल है|एक महीना दबाई रखी जांच रिपोर्ट, खुलासा होने पर डायरेक्टर बोले-
22नवंबर से लेकर 2 दिसंबर तक मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में डिलीवरी के लिए आईं चार महिलाओं की मौत के मामले में पूरी तरह से संबंधित डाक्टरों और स्टाफ की बचाया जा रहा है। यही वजह है कि तीन मेंबरी जांच कमेटी की रिपोर्ट को एक महीना तक अंदर ही दबाकर रखा गया। खुलासा होने पर डायरेक्टर हेल्थ बोले कि हम केवल सरकार को कार्रवाई की सिफारिश कर सकते हैं, सीधे तौर पर कार्रवाई नहीं कर सकते। और तो और सेहत महकमे ने 26 नवंबर को हुई लीना निवासी लुधियाना की मौत को दबा ही लिया। केवल तीन मौतों की ही जांच की गई। रिपोर्ट में सामने आया है कि ये तीनों मौतें इंफेक्शन की वजह से हुई हैं। फिर भी सेहत महकमे का कोई अधिकारी अपने स्टाफ पर एक्शन लेने को तैयार नहीं है।
मौतों के बाद लेबर रूम चेंज करना सवालों के घेरे में
चार महिलाओं की मौतों के बाद हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने फर्स्ट फ्लोर से लेबर रूम बदलकर ग्राउंड फ्लोर पर लाया था। ऊपर वाले लेबर रूम में फ्यूमीगेशन के बाद फिर वहां पर लेबर शिफ्ट किया गया। सूत्रों के अनुसार हॉस्पिटल मैनेजमेंट को हर हफ्ते आप्रेशन थियेटर के चारों कोनों से स्वैप लेकर भेजने होते हैं। मौतों से पहले ऐसा भी नहीं होता था। बाहरी लोगों की लेबर रूम में सीधे दखलअंदाजी रहती थी। यही नहीं, अमृता की मौत में सीएमसी मैनेजमेंट ने जो डेथ सर्टिफिकेट जारी किया है, उसमें भी साफ लिखा है कि अमृता की मौत सेप्टिक शॉकर की वजह से हुई। सेप्टिक शॉक इंफेक्शन फैलने को ही कहा जाता है। ऐसे ही कुछ और बातें भी जांच में सामने आईं। जहां से तीनों मौतों का कारण इंफेक्शन ही निकला।
इंसाफ के लिए सांझा संघर्ष करेंगे पीड़ित परिवार
मौतोंके लिए जिम्मेदार डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग के लिए अब तक कमेटी की रिपोर्ट के इंतजार में बैठे पीड़ित परिवार सांझा संघर्ष करेंगे। अमृता का जेठ राज कुमार पुलिस से शिकायत कर चुका है। रूबी का पति संतोष और सुजाता की मां कांता भी पुलिस से शिकायत करेंगे। ये तीनों परिवार मिलकर लड़ाई लड़ेंगे। वे सामाजिक संगठनों के सहयोग से सिविल सर्जन दफ्तर या सिविल हॉस्पिटल में धरना देने की योजना भी बना रहे हैं।
^जांच रिपोर्ट में मौतों का कारण इंफेक्शन आया है। इसके लिए कोई कोई तो जिम्मेदार जरूर है। हम अपनी तरफ से कार्रवाई की सिफारिश लिखकर ही भेज सकते हैं। एक्शन लेना सरकार की पावर है, हमारी नहीं। एक-दो दिन में रिपोर्ट आगे भेज दी जाएगी। -डॉ.एचएस बाली, डायरेक्टर हेल्थ
^देख लेते हैं रिपोर्ट में क्या आया है। इंफेक्शन है कि और कुछ भी। अभी कुछ नहीं कह सकते। जब कमेटी अपनी फाइनल रिपोर्ट मुझे दे देगी, उसके बाद हम देखेंगे कि करना क्या है। -सुरजीतज्याणी, सेहत मंत्री
इंजेक्शन का सैंपल आया था नॉट ऑफ स्टैंडर्ड
मौतोंके बाद हॉस्पिटल में से वॉटर फॉर इंजेक्शन का एक सैंपल, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का एक सैंपल, एंटीबायटिक के तीन सैंपल, आईबी फ्ल्यूड के तीन सैंपल, डिस्पोजेबल सीरिंज के तीन सैंपल, डिक्लो पेन किलर इंजेक्शन के एक सैंपल, मैट्रोजिल का एक सैंपल जांच के लिए भेजा गया था। 13 सैंपलों में से 1 इंजेक्शन ऑक्सीटोसिन का सैंपल नॉट ऑफ़ स्टैंडर्ड क्वालिटी आया है। इससे साफ हो गया है कि डिलीवरी से पहले महिलाओं को घटिया क्वालिटी का इंजेक्शन भी लगाया गया था।
{ज्याणी का रटारटाया जवाब- देखते हैं, कर लेंगे, टाइम तो लगता ही है