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आधी रात को ठंड में फुटपाथ पर सोते बेघरों को कंबल बांटने पहुंचे डीसी

5 वर्ष पहले
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सरकारीऑफिस की आखिरी कतार में खड़े आदमी तक इंसाफ पहुंचाने के अरमान लिए आए डीसी रवि भगत ने सोमवार आधी रात को समाज के आखिरी पायदान पर खड़े बेघरों की सुध लेने पहुंचे। पायलट जिप्सी के बगैर एक गनमैन के साथ अपनी गाड़ी में वो बिना हूटर के सर्किट हाउस से निकले और शहर में कई जगहों पर घूमकर फुटपाथ पर ठंड में सोते बेघरों को कंबल ओढ़ाते गए। फिर वो बेघरों के रहने के लिए घंटाघर चौक पर बने नाइट शेल्टर में पहुंचे और वहां के इंतजाम भी चैक किए।

इतनी खामोशी से उन्होंने यह काम किया कि आसपास मौजूद और वहां से गुजरते लोगों को भी पता चला कि कंबल बांटने वाले इस जिले के डिप्टी कमिश्नर हैं। फिर इसी तरह वो चुपचाप वापस सर्किट हाउस लौट आए।

उन्होंने भारत नगर चौक, गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज, दुर्गा माता मंदिर, जगराओं ब्रिज, घंटाघर और दंडीस्वामी में घूमकर बेघरों को लगभग 200 कंबल बांटे।



आधी रात को सर्किट हाउस में मनाया बर्थ-डे

अपनेबर्थ डे के दिन डीसी कोढ़ रोगियों के बच्चों, बुजुर्गों और ब्लाइंड चिल्ड्रन्स से मिले थे। नई ज्वाइनिंग की वजह से परिवार से दूर सर्किट हाउस में ठहरे हैं। अकेले होने की वजह से कोई बर्थडे सेलिब्रेशन नहीं हुआ। इसका पता चला तो डिस्ट्रिक्ट पब्लिक रिलेशन अफसर(डीपीआरओ) ने उनके बर्थ डे पर केक मंगवा लिया। फिर सर्किट हाउस में डीसी ने केक काटा।

भिखारी को बोले, मेरे आॅफिस आकर मिलना

दुर्गामाता मंदिर के पास डीसी रवि भगत ने फुटपाथ पर सो रहे एक शख्स को पूछा कि वो कोई काम क्यों नहीं करता? भीख क्यों मांगता है?। भिखारी ने कहा कि वो किसी फैक्ट्री में काम करता था। फैक्ट्री मालिक ने उसके सारे पैसे दबा लिए और नौकरी से निकाल दिया। उसे कहीं नौकरी नहीं मिली तो मजबूरी में फुटपाथ पर सोना पड़ा और भीख मांगनी शुरू कर दी। डीसी रवि भगत ने कहा कि वो सीधे उनके दफ्तर आए। वहां किसी दूसरे को मिलने की जरूरत नहीं, सीधे उनसे आकर मिले। वो बताए कि किसने उसके पैसे रख उसे बेघर किया। फिर वो स्ट्रिक्ट एक्शन लेंगे।

^ वैसे तो हमारी ड्यूटी है कि सभी बेघरों को सुरक्षित और पक्का ठिकाना दिया जाए लेकिन मैंने सोचा कि तुरंत उन्हें कोई राहत दे सकें। इसलिए मैं कंबल बांटने गया। मेरी कोशिश रहेगी कि इन लोगों को किसी कामकाज में लगा आत्मनिर्भर बनाकर जीवन स्तर ऊंचा उठाया जा सके। ताकि वो समाज में सम्मान से जी सकें। इसके लिए क्या हो सकता है? इस पर डिस्कशन करूंगा। रविभगत, डिप्टी कमिश्नर।

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