कर्ज में डूबे किसानों के दो बेटों ने दी जान
पिताकर्जा उतार नहीं पा रहा था, परेशान इकलौते बेटे ने जान दे दी। किसान के पास मात्र दो एकड़ जमीन थी, जिसकाे उसने करीब 4 साल पहले सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में गिरवी रखकर 3 लाख रुपए कर्ज ले रखा है। जबकि डेढ़ लाख रुपए उसने आढ़ती से कर्जा लिया हुआ है। गांव जैमलवाला के किसान आत्मा सिंह (66) ने पुलिस को बयान दिया कि वह बैंक आढ़ती के कर्ज को चुका पाने के कारण काफी परेशान था। यह देखकर उसका बेटा जगदेव सिंह (40) भी परेशान हो गया था। बेटे जगदेव ने कई बार कर्ज के संबंध में बातचीत भी की लेकिन कोई रास्ता नहीं निकल रहा था। वीरवार शाम उसने कीटनाशक दवा निगल ली। तबीयत बिगड़ने पर उसे मोगा के अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे लुधियाना रेफर किया गया लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। शुक्रवार को बुजुर्ग किसान के कंधे पर इकलौते बेटे की अर्थी देख हर शख्स की आंखों में आंसू थे। लाेगों ने बताया कि एक ही बेटा था जोकि शादीशुदा होने के साथ दो बच्चों का पिता भी था। गांव के सरपंच ने बताया कि जगदेव आर्थिक तंगी के कारण परेशान था। किसान के परिवार में सभी मेंबर एक साथ रहते हैं। गांव के लोगों ने पुलिस को बताया कि कर्ज को लेकर कई महीनों से वह दुखी था।
फाजिल्का | सूबेमें कर्ज में डूबे किसान भले ही लगातार खुदकुशी कर रहे हैं पर सरकार किसानों के लिए आए दिन बड़े-बड़े दावे करने से चूक नहीं रही है। शुक्रवार को फाजिल्का में डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल ने संगत दर्शन के दौरान कहा कि खेती को लाभदायक धंधा बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हितों को विशेष तवज्जो दे रही है। इस लिए राज्य सरकार ने अपने स्तर पर किसानों के लिए ट्यूबवेलों के बिजली बिल माफ किए हैं। किसानी की तरक्की के लिए फसलों के कम से कम समर्थन मूल्य को थोक कीमत सूचकांक के साथ जोड़ा जाना चाहिए। -विस्तृत| पंजाब पेज
...और इधर, सरकार के दावे देखिए
लौंगोवाल। शुक्रवारको गांव मंडेर खुर्द में कर्ज तले दबे किसान ने खेत में कीटनाशक पीकर खुदकुशी कर ली है। तकदीर सिंह (40) के पास सिर्फ 2 एकड़ जमीन थी। वह खेत में कीटनाशक पीकर खाल में पड़ गया। जब किसान घर पहुंचा तो परिवार वाले खेत पहुंचे। तकदीर सिंह मृतक पड़ा था। किसान ने दो साल पहले अपनी बेटी की शादी की थी और कर्ज से परेशान रहता था।
बरेटा में भी इसी तरह का मामला सामने आया। यहां कर्ज में डूबा किसान बीमार था, पैसे की किल्लत के कारण बेटा इलाज नहीं करा पा रहा था। पिता की बिगड़ती हालत को यादविंदर सिंह (38) इतना पेरशान हो गया कि शुक्रवार को उसने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। परिवारवालों ने बताया कि एक तो बैंक प्राइवेट फाइनेंसरों का दो लाख का कर्ज था, दूसरा पिता की हार्ट की बीमारी के इलाज में काफी पैसा खर्च हो रहा था। इसे लेकर वह काफी परेशान रहता था। शुक्रवार को किसी को बताए बिना घर से चला गया रेलवे लाइन पर रही ट्रेन के नीचे आकर खुदकुशी कर ली।