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ओवरस्पीड बस के आतंक से हुआ सामना तो डर गए भाजपा जिला प्रधान

5 वर्ष पहले
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लुधियाना। पंजाब में सत्ताधारी गठबंधन में हिस्सेदार भाजपा के जिला प्रधान प्रवीण बांसल का ओवरस्पीड बस के आतंक से सामना हुआ तो वो सिहर कर रह गए। जुझार कंपनी की इस बस से बाल-बाल एक्सीडेंट से बचने की बात कहकर उन्होंने फेसबुक पर अपना यह दर्द बयां किया। उन्होंने जुझार बस वालों पर पैसे और ताकत के मद में चूर होने का आरोप जड़ते हुए प्रशासन से भी सवाल पूछा कि उन्होंने क्या बसों को मौत बांटने का लाइसेंस दे रखा है?। खुद की सरकार होने के बावजूद भाजपा प्रधान बंसल की यह बेबसी साबित करती है कि पंजाब में किस कदर बसें “अाउट ऑफ कंट्रोल’ हो चुकी हैं। कोई भी उन पर लगाम कसने वाला नहीं है। हालात इतने बदतर हैं कि खुद सत्ता में होने के बावजूद बंसल ने बस पर एक्शन लेने के लिए किसी अथॉरिटी को एप्रोच करने की जगह फेसबुक के जरिए लोगों तक बात पहुंचाई। बता दें कि पिछले कुछ समय से बसों से एक्सीडेंट्स की वजह से लोग मर रहे हैं।

मैंने आज तक सिर्फ लोगों से सुना था और अखबारों मे ही पढ़ा था कि बसों की तेज रफ्तार कैसे आतंक फैलाती हैं। आज जब इस को खुद की आंखों से देखा तो सिहर गया..आज 1.30 बजे के करीब में circut house से d.c. Office जा रहा था तो अचानक एक बहुत ही तेज रफ्तार बस जिस की head lights on थी और driver का हाथ हॉर्न पर था, एकदम पीछे देख मुझे एक बार तो लगा कि मुझे ही कुचलने जा रहा है तो speed बड़ा ली .....मुझे आज गाड़ी चलाते लगभग 25 साल हो गए हैं और लगभग देश के हर कोने मे मुझे गाड़ी चलाने का अनुभव हैं, मैंने बड़ी मुश्किल से और कुशलता से पहले accident से बचाया और बस और कार में कुछ distance बनाने की कोशिश की लेकिन बस एक पल के लिए भी धीरे नहीं हुई, driver का हाथ एक पल के लिए भी horn से नहीं हटा ....मैंने ही बस को बड़ी मुश्किल से उस को cross करने दिया और वो juzzar company के बस का driver आंखें दिखाता आगे बढ़ गया और मैं सोचता रह गया कि प्रशासन ने कैसे इन को मौत बांटने का licence दिया हैं? क्या इनके लिए कोई नियम ओर कानून नहीं? कब तक यह पैसे ओर ताकत के मद में चूर लोगों की जिंदगियों से खेलते रहेंगे। “बेटियांऔर बहनें कैसे बर्दाश्त करती होंगी सोच कर भी डर लगता है’

बांसल मेरे शुभचिंतक इसलिए जुझार का नाम

शहर में ट्रैफिक बढ़ गया, लेकिन टाइम टेबल पुराना है। एेसे में स्पीड और हॉर्न बजाना जरूरी है। उसके बिना तय वक्त पर नहीं पहुंच सकते। मुझे खुद इससे दिक्कत होती है, लेकिन टाइम की मजबूरी है। जिला भाजपा प्रधान प्रवीण बांसल मेरे शुभचिंतक हैं, इसलिए उन्होंने मेरी बस कंपनी का नाम लिख दिया। -गुरदीप जुझार


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