मुक्तसर/मोगा। अकालियों की बसों से लगातार हो रहे हादसों में रोजाना लोग कुचलकर मर रहे हैं और पुलिस कार्रवाई के नाम पर ड्राइवर पर लापरवाही के तहत एफआईआर, थाने में ही जमानत और रिहाई कर रही है। मामला कोर्ट में पहुंचता है तो एक के बाद एक गवाह मुकर जाते हैं।
सजा तो दूर, एक केस में भी जुर्माना नहीं हुआ। मंगलवार को भी ऐसी ही घटनाएं हुईं, जिसमें हलका लंबी के गांव कवरवाला में बादल परिवार की कंपनी डबवाली ट्रांसपोर्ट की तेजरफ्तार बस ने रेहड़ा चालक को पीछे से टक्कर मारकर उड़ा दिया। अस्पताल में उसकी मौत हो गई। शाम को बठिंडा में अकाली दल के गिद्दड़बाह के हलका इंचार्ज हरदीप सिंह डिंपी ढिल्लों की न्यू दीप कंपनी की बस ने माली हेतराम को पीछे से टक्कर मारी और कुचलकर 200 फीट तक घसीटकर ले गई। दूसरी ओर, ऑरबिट बस कांड की मुख्य पीड़ित छिंदर कौर भी कोर्ट में बयान से मुकर गई। आरोपियों को पहचानने से इनकार कर दिया।
पहला हादसा
सुबह 6.30 बजे हलका लंबी के गांव कवरवाला के पास मुख्यमंत्री परिवार की डबवाली ट्रांसपोर्ट की बस ने एक रेहड़ा चालक को पीछे से टक्कर मार दी। इससे गांव सरावा बोदला निवासी ईंट भट्ठे पर काम करने वाला रोशन (50) जख्मी हो गया। अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुलिस ने बस चालक गुरप्रीत पर केस दर्ज कर लिया, मगर गिरफ्तारी नहीं हुई। मृतक के परिवार ने लाश अस्पताल में रखकर धरना दिया।
दूसरा हादसा
शाम 4.45 बजे बठिंडा के एनएफएल के सामने अकाली नेता हरदीप सिंह डिंपी ढिल्लों की बस ने एक माली राम हेत (60) को टक्कर मार दी। बस इतनी तेज रफ्तार थी कि 200 फीट तक रामहेत को घसीटकर ले गई। जब लोगों ने बस पर पथराव किया तो ड्राइवर भाग निकला। न्यूदीप बस से पिछले 5 दिन में ही यह दूसरी जान ली है। पुलिस ने ड्राइवर पर केस दर्ज कर लिया है।
अारोपियों को पहचानने से इनकार
मोगा ऑरबिट बसकांड में मंगलवार को सुनवाई के दौरान मृतक अर्शदीप की मां छिंदर कौर ने पेश किए चारों आरोपियों को पहचानने से इनकार कर दिया। उसने कहा जब घटना हुई तो उसे कोई सुध नहीं थी कि क्या हो रहा है ? और पुलिस ने जो केस दर्ज किया है वह मेरा बयान नहीं है। 45 मिनट अदालत में हुए अपने बयान में छिंदर कौर ने न तो आरोपी पहचाने, न ही उनके खिलाफ बयान दिया। सुबह 11 बजे छिंदर कौर अपने पति सुखदेव के साथ अदालत पहुंची और 12 बजे तक वहां रही। जज को दिए बयान में छिंदर कौर ने कहा कि 29 अप्रैल को जब घटना हुई तो उसे सुध नहीं थी। 30 अप्रैल को पुलिस ने उसके बयान पर जो एफआईआर दर्ज की, यह उसके बयान नहीं है। ये पुलिस ने अपनी ओर से लिखे हैं। छिंदर कौर के बेटे आकाशदीप की नौंवी की परीक्षा होने से मंगलवार को उसके बयान नहीं हुए। अब 25 मार्च को होने वाली केस की अगली सुनवाई पर उसके बयान होंगे।
केस तो बने, कार्रवाई नहीं हुई
केस 1 : पहले परिवार गायब हुआ, फिर अदालत में गवाहों के बयान बदलने लगे
29 अप्रैल 2015 को मोगा-बाघापुराना के बीच ऑरबिट बस से 12 साल की अर्शदीप और उसकी मां को फेंक दिया गया, जिससे अर्शदीप की मौत हो गई। जांच के लिए जस्टिस बाली आयोग जब मोगा पहुंचा तो पीड़ित परिवार सरकारी गनमैन समेत गायब मिला। पुलिस ने चालान पेश किया तो वहां पर पहले से पेश किए गवाह और पिता सुखदेव मुकर गए। अब मां छिंदर भी मुकर गई।
केस 2: पटियाला में केस के चालान से गायब किया बस का नाम
जनवरी 2013 को पटियाला निवासी हॉकी कोच हरदेव सिंह को ऑरबिट कंपनी की बस ने टक्कर मार दी। अपाहिज होकर हरदेव सिंह कंपनी के खिलाफ केस लड़ता रहा। मगर जब पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया तो बस का नाम ही गायब कर दिया। बाद में हरदेव सिंह ने कानूनी लड़ाई लड़कर इसे ठीक करवाया।
पंजाब में लॉ एंड आर्डर नहीं, बादल का कानून चलता है। तभी तो रोजाना बसों के नीचे लोग कुचलकर मर रहे हैं और गवाह मुकर रहे हैं। पुलिस कठपुतली और नेता गुंडागर्दी पर उतारु हैं। -संजय सिंह, पंजाब प्रभारी, आप
मरने वाले लोगों के समझौते खुद एसएसपी करवाते हैं। फिर चाहे वह चन्नू में हुआ हादसा हो, भगता का हो। हर जगह एसएसपी जाकर परिवार पर दबाव बनाते हैं। कांग्रेस इंसाफ के लिए संघर्ष करेगी।
चरणजीत चन्नी, कांग्रेस