भूमि अभी तक मिली नहीं, क्रेडिट लेने के लिए पूजन कर चले गए सुखबीर

5 वर्ष पहले
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लुधियाना। जिस 17 किलोमीटर लंबे लाडोवाल बाईपास के लिए मुआवजा देकर जमीन एक्वायर होनी तो दूर अभी तक मुआवजा ही तैयार नहीं हो सका, फिर भी आगामी विधानसभा चुनावों में क्रेडिट के लिए डिप्टी सीएम सुखबीर बादल बुधवार को उसका भूमि पूजन करके चले गए। इससे पहले 14 सितंबर को केंद्रीय रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी के साथ भी सुखबीर बादल इसका नींव पत्थर रख चुके हैं।
उस वक्त भी सुखबीर ने तुरंत काम शुरू करने की बात कही थी लेकिन जमीन एक्वायर न होने की वजह से प्रभावी ढंग से काम शुरू नहीं हो सका। इस काम को ढाई साल में पूरा करने का टारगेट है लेकिन देरी की वजह से इसके लंबे लटकने के आसार बन चुके हैं।
500 प्रॉपर्टीज का मुआवजा बनेगा, फिर एनएचएआई देगा
बता दें कि एनएचएआई ने लाडोवाल से साउथ सिटी तक चौदह किलोमीटर लंबे लाडोवाल बाईपास पर 500 प्रॉपर्टीज एक्वायर करने का नोटिफिकेशन इश्यू इसी साल 6 जून को जारी किया था। चूंकि बाईपास एनएचएआई बना रही है, इसलिए मुआवजा भी उन्हें ही देना है। मुआवजे की राशि जिला प्रशासन को तय करनी है। जिसमें उन्हें जमीनों की वैरायटी के हिसाब से रेट तय करना है। यह राशि एनएचएआई को भेजी जाएगी और फिर मुआवजा दिया जाएगा और इसके बाद जमीन एक्वायर होगी। लेकिन, हकीकत में अभी तक रेट ही तय नहीं हुआ है। ऐसे में साफ है कि यह प्रक्रिया लंबी चलेगी।
प्रशासन की देरी से कंपनी भी परेशान :
क्रेडिट के चक्कर में पंजाब सरकार की जल्दबाजी कहें या फिर प्रशासन की देरी, इससे लाडोवाल बाईपास बनाने का कॉन्ट्रेक्ट लेने वाली कंस्ट्रक्शन कंपनी भी परेशान है। मुआवजा राशि बनवाने के लिए वो अफसरों के चक्कर काट रहे हैं। हालांकि कंपनी ने यहां दफ्तर खोल लिया है और खुद ही जमीन मालिकों काे समझा-बुझाकर रोड की चौड़ाई के हिसाब से सर्वे व निशानदेही करने लगे हैं। हालांकि, कंपनी अफसर खुलकर इस इश्यू पर कुछ नहीं कह रहे हैं।
हमसे कोई ऐतराज नहीं मांगे गए
अखबार में नोटिस आया था, तब भी हमें किसी ने बताया कि हमारी भी जमीन आई है। इसके बाद न कोई जमीन देखने आया और न नपाई करने। हमसे कोई एेतराज भी नहीं मांगे गए और न ही किसी अफसर ने हमें बुलाया। हमें इस प्रक्रिया का कुछ पता नहीं है।
-मुनीश जैन, जमीन मालिक
मुआवजा बना हम एनएचएआई को भेजेंगे
हमने लोगों के एतराज ले लिए हैं, अब बस मुआवजे की राशि तैयार करनी है। इसके लिए जमीन के एग्रीकल्चरल, रेजिडेंशियल, कॉमर्शियल केटेगरी देख रहे हैं। मुआवजा बना हम एनएचएआई को भेजेंगे और वो जमीन मालिकों को देंगे। फिर जमीन एक्वायर होगी। डिप्टी सीएम के दौरे व इलेक्शन एक्टिविटीज में थोड़े व्यस्त हैं, लेकिन जल्द इसे तैयार कर देंगे।
-सुभाष चंद्र, एसडीएम (वेस्ट)
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