जालंधर। आम धारणा है कि पुलिस ऐसे हादसों के वक्त भी प्रोफेशनल अंदाज में कार्रवाई करने के साथ गड़बड़ी भी करती है। इस हादसे ने शायद बाल-बच्चों वाले पुलिस मुलाजिमों पर भी गहरा असर डाला। माछीवाड़ा थाने की पुलिस ने कार से मिले गहने, कीमती कपड़े तो सहेजे ही, बाकी मासूम बच्चों का सामान भी कब्जे में लेकर उसकी लिस्ट बनाई। फिर लोगों की मौजूदगी में पीड़ित परिवारों को सौंपा। उधर, इस हादसे का एक और मार्मिक पहलू बाद में सामने आया। कार डूबते वक्त उसके सभी शीशे बंद थे।
दलबीर के फौजी साले जसजीत सिंह की पत्नी राजविंदर कौर ने अपने अलावा कार में सवार अपने बेटे, अपनी दोनों ननद और उनके दो बच्चों को बचाने की कोशिश की। वह पिछली सीट पर बैठी थी और उसने अपना सिर साइड वाले शीशे में मारकर उसे तोड़ने का प्रयास किया। हाथ मारकर भी ऐसी ही कोशिश की, मगर नाकाम रही। जिसके चलते उसके हाथ की उंगलियां भी टूट गईं।
हादसे में मरने वाली मनप्रीत कौर और राजविंदर कौर की लाशों का पोस्टमार्टम समराला के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के बोर्ड ने किया। मामला पेचीदा होने के चलते पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बारीकी से मौत के कारणों का खुलासा किया जाएगा। जिसके आधार पर ही आगे की पुलिस जांच निर्भर करेगी। दोनों महिलाआें की लाश पोस्टमार्टम के बाद उनके परिजन अंतिम संस्कार के लिए हरियाणा ले गए।